चीन की गोद में बांग्लादेश! तारिक रहमान के ‘खतरनाक एजेंडे’ से भारत की बढ़ी टेंशन
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहा है। इस बीच, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान को लेकर कई गंभीर दावे सामने आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश तेजी से चीन के प्रभाव में जा रहा है, जिससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को बड़ा झटका लग सकता है।
‘भीख का कटोरा’ और चीन का जाल
ताजा विश्लेषणों और रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर चीन वहां अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि बीजिंग ने एक बार फिर अपनी ‘कर्ज जाल नीति’ (Debt-trap diplomacy) को एक्टिव कर दिया है, जिसके तहत बांग्लादेश को आर्थिक रूप से पूरी तरह अपने ऊपर निर्भर बनाया जा रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों ने इसे बांग्लादेश के हाथ में ‘भीख का कटोरा’ थमाने जैसा बताया है, जहाँ देश की संप्रभुता चीनी निवेश के बदले गिरवी रखी जा सकती है।
भारत के लिए क्यों खतरनाक हैं तारिक रहमान?
लंदन में लंबे समय तक निर्वासन में रहने के बाद बांग्लादेश की राजनीति को रिमोट कंट्रोल से चलाने वाले तारिक रहमान का इतिहास भारत विरोधी रुख का रहा है। रक्षा और सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि रहमान का एजेंडा भारत के लिए बेहद संवेदनशील हो सकता है:
- पूर्वोत्तर में अस्थिरता का खतरा: अतीत में जब BNP सत्ता में थी, तब भारत के पूर्वोत्तर (North-East) के उग्रवादी गुटों को बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल करने की छूट मिली थी। रहमान की वापसी से यह खतरा दोबारा पैदा हो सकता है।
- चिकन नेक (Siliguri Corridor) पर दबाव: बांग्लादेश की चीन से बढ़ती नजदीकी भारत के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए सुरक्षा चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
- कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा: तारिक रहमान और उनकी पार्टी पर जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं, जो भारत की सीमा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं।
ड्रैगन की चाल से सावधान रहने की जरूरत
भारत हमेशा से बांग्लादेश का एक विश्वसनीय और मददगार पड़ोसी रहा है। संकट के समय में नई दिल्ली ने हमेशा ढाका का साथ दिया है। हालांकि, मौजूदा परिदृश्य में अगर बांग्लादेश पूरी तरह चीन के पाले में चला जाता है, तो यह पूरे दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को बिगाड़ देगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को इस बदलते घटनाक्रम पर पैनी नजर रखनी होगी और अपनी सीमाओं की सुरक्षा को और पुख्ता करना होगा।
