भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत पर फिर छिड़ी चर्चा, रिपोर्टों का सरकार ने किया खंडन; कमर चीमा की टिप्पणी चर्चा में
भारत और पाकिस्तान के बीच कथित बातचीत को लेकर हाल के दिनों में कई तरह की अटकलें सामने आईं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में मिले थे। हालांकि, भारत सरकार के सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है। इस बीच पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक और स्वतंत्र टिप्पणीकार कमर चीमा की टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
बातचीत को लेकर क्या था दावा?
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की कोशिशें चल रही हैं और दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की श्रीलंका में मुलाकात हुई है। हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों ने इन खबरों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी किसी बैठक की पुष्टि नहीं है।
कमर चीमा ने क्या कहा?
पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषक और स्वतंत्र टिप्पणीकार कमर चीमा ने अपने विश्लेषण में कहा कि भारत फिलहाल पाकिस्तान के साथ औपचारिक बातचीत के पक्ष में नहीं दिख रहा है। उनके अनुसार, भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के जरिए बातचीत करने के संकेत भी नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के प्रति लगातार सख्त नीति अपनाई है और मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत शुरू करना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से आसान फैसला नहीं होगा।
पाकिस्तान के रुख पर भी रखी अपनी बात
कमर चीमा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत की इच्छा जताई जा रही है। उनके मुताबिक, इस समय पाकिस्तान में सरकार और सेना के बीच पहले जैसी खींचतान नहीं दिख रही और दोनों एक समान रुख अपनाते नजर आ रहे हैं, इसलिए इस समय इस्लामाबाद बातचीत के लिए अधिक इच्छुक दिखाई देता है।
बातचीत जारी रहने की वकालत
अपने बयान में कमर चीमा ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान को पूरी तरह संवाद समाप्त नहीं करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन देशों के बीच लंबे समय तक राजनयिक संबंध नहीं रहे, वे भी समय-समय पर बातचीत करते रहे हैं। ऐसे में उनका मानना है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच संवाद की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होनी चाहिए।
भारत सरकार का क्या है रुख?
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ किसी भी आधिकारिक या अनौपचारिक ‘ट्रैक-II’ बातचीत को फिलहाल मंजूरी नहीं दी है। सरकार का कहना है कि ऐसी किसी पहल का न तो समर्थन किया जा रहा है और न ही उसे स्वीकृति मिली है। इसके अलावा, सिंधु जल संधि के तहत किसी प्रकार की रियायत या नरमी की संभावना से भी इनकार किया गया है। हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) से जुड़े मुद्दों और अन्य द्विपक्षीय मामलों पर भी भारत की मौजूदा नीति में किसी बदलाव के संकेत नहीं दिए गए हैं।
