हिंदुओं की मौत पर चुप्पी और गजा पर आंसू! सोनिया गांधी के लेख पर भड़का आक्रोश, क्या कांग्रेस का ‘सेलेक्टिव अप्रोच’ उसे बहुसंख्यकों से कर रहा है दूर?
Sonia Gandhi article on Gaza: राजनीति में ‘चुनिंदा दर्द’ और दोहरे मापदंड अक्सर भारी पड़ते हैं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा गजा (Gaza) संघर्ष को लेकर लिखे गए एक ताजा लेख ने देश के भीतर एक नई सियासी बहस और आक्रोश को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस नेत्री गजा के हालातों पर केंद्र की मोदी सरकार को घेर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता और विपक्षी दल यह सवाल उठा रहे हैं कि पड़ोसी देशों में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचारों पर कांग्रेस आलाकमान की कलम खामोश क्यों हो जाती है?
मोदी सरकार पर हमला
कांग्रेस की आलाकमान सोनिया गांधी ने एक राष्ट्रीय अखबार में गजा संकट को लेकर एक लंबा-चौड़ा लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने इजरायल की कार्रवाई और उस पर भारत सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि गजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर केंद्र की मोदी सरकार की ‘पत्थर जैसी चुप्पी’ न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय हितों के नजरिए से भी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि गजा में बच्चों और आम नागरिकों पर हो रहे हमलों को देखते हुए भारत को वैश्विक मंच पर अपनी आवाज उठानी चाहिए थी।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में यह भी दावा किया कि दुनिया के कई देशों ने इजरायल की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है, लेकिन भारत इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन है। उन्होंने आशंका जताई कि भारत धीरे-धीरे इजरायल के रणनीतिक दायरे में समाता जा रहा है।
‘सेलेक्टिव अप्रोच’ पर जनता का फूटा गुस्सा
सोनिया गांधी का यह लेख सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में उनके ‘सिलेक्टिव नैरेटिव’ पर तीखे सवाल उठने लगे हैं। देश का एक बड़ा वर्ग कांग्रेस से यह पूछ रहा है कि जब पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं का बेरहमी से कत्लेआम होता है, उनके घरों और दुकानों को फूंक दिया जाता है, और हिंदू महिलाओं के साथ सरेआम बर्बरता की जाती है, तब कांग्रेस नेतृत्व की हमदर्दी कहां चली जाती है?
जनता द्वारा उठाए जा रहे कुछ मुख्य सवाल:
- हिंदुओं के मानवाधिकारों पर चुप्पी क्यों? पाकिस्तान में आए दिन नाबालिग हिंदू बच्चियों का जबरन अपहरण और धर्म परिवर्तन कराया जाता है, प्राचीन मंदिरों को डायनामाइट से उड़ा दिया जाता है, लेकिन तब कांग्रेस को आम नागरिकों और बच्चों के मानवाधिकार याद क्यों नहीं आते?
- क्या यह तुष्टिकरण का एजेंडा है? क्या हिंदुओं के हक में आवाज उठाना कांग्रेस के वोट बैंक समीकरण में फिट नहीं बैठता?
- धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा क्या है? गजा के मुस्लिमों के लिए अखबारों के पन्ने काले करना और पड़ोस में तड़पते हिंदुओं की लाशों पर आंखें मूंद लेना, क्या यही कांग्रेस का सेक्युलरिज्म है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यही रवैया और एकतरफा रुख उसे देश के बहुसंख्यक समाज से लगातार दूर कर रहा है, जिसके कारण पार्टी को देश के कोने-कोने से चुनावी शिकस्त का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोनिया गांधी के इस लेख पर बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस देश की संवेदनशील विदेश नीति जैसे मुद्दों पर भी सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक की घटिया राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोनिया गांधी को आड़े हाथों लेते हुए अपने सोशल मीडिया हैंडल पर कहा:
“सोनिया गांधी देश के लोगों को गुमराह करने और वैश्विक मंच पर भारत के वास्तविक और संतुलित रुख को छिपाने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस को राष्ट्रीय हितों से ज्यादा एक विशेष वर्ग को खुश करने की चिंता है।”
भारत क्यों खड़ा है इजरायल के साथ?
विदेशी मामलों के विशेषज्ञ (Foreign Experts) सोनिया गांधी के दावों के विपरीत भारत और इजरायल के मजबूत संबंधों को देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी मान रहे हैं। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:
- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: भारत इजरायल के साथ मजबूती से इसलिए खड़ा है क्योंकि इजरायल आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति रखता है, जिससे भारत खुद दशकों से पीड़ित है।
- संकट का पुराना साथी: जब-जब पाकिस्तान ने भारत की पीठ में छुरा घोंपा या वैश्विक मंचों पर भारत को घेरने की कोशिश की, इजरायल हमेशा एक सच्चे दोस्त की तरह भारत के साथ खड़ा रहा।
- इतिहास की कमजोर नीतियां: विशेषज्ञों के अनुसार, अतीत में गजा और फिलिस्तीन को लेकर कांग्रेस की ढुलमुल और कमजोर नीतियों के कारण भारत वैश्विक पटल पर अलग-थलग पड़ गया था।
- मोदी-नेतन्याहू की मजबूत केमिस्ट्री: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीतिक दोस्ती का ही नतीजा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी शर्तों पर फैसले ले रहा है।
कांग्रेस काल बनाम मोदी युग
सोनिया गांधी भले ही आज भारत की विदेश नीति पर कीचड़ उछाल रही हैं, लेकिन देश की जनता को कांग्रेस शासनकाल का वो दौर भी याद है जब पाकिस्तान हमारे देश पर आतंकी हमले करता था और तत्कालीन सरकार सिर्फ डोजियर (दस्तावेज) भेजकर दुनिया के सामने गुहार लगाती थी। पाकिस्तान के खिलाफ कोई कड़ा सैन्य कदम उठाने की हिम्मत तब की सरकार में नहीं थी।
इसके विपरीत, आज का नया भारत पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर मारता भी है (सर्जिकल और एयर स्ट्राइक) और दुनिया भर को सीना ठोक कर बताता भी है। आज दुनिया की महाशक्तियां भी भारत के फैसलों के साथ खड़ी दिखाई देती हैं। मोदी सरकार की यही ‘राष्ट्रप्रथम’ की नीति शायद कांग्रेस और उनके करीबियों को हजम नहीं हो रही है।
क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है?
सोनिया गांधी के इस लेख के बाद अब यह गंभीर सवाल भी उठने लगा है कि क्या देश की मजबूत विदेश नीति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े करने और भारत की साख को बट्टा लगाने के लिए किसी प्रकार का नैरेटिव सेट किया जा रहा है? यदि इस बात में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए बेहद घातक है।
