नेहरू की सिगरेट के लिए उड़ता था विमान, आज ‘मेलोडी’ टॉफी पर हंगामा!

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजनीति में जब हमले व्यक्तिगत होने लगें, तो इतिहास के पन्नों का पलटना लाजिमी हो जाता है। इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर संसद तक कांग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की मुलाक़ात के दौरान दिए गए एक ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट पर हल्ला मचा रही है। राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस इसे देश की विदेश नीति का मज़ाक बता रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या एक प्रधानमंत्री द्वारा अपने विदेशी समकक्ष को भारतीय मिठाई या टॉफी भेंट करना अपराध है? और अगर यह अपराध है, तो पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर के उन ‘शाही किस्सों’ को क्या नाम दिया जाए, जहां राष्ट्र की प्राथमिकताएं निजी शौक के धुएं में उड़ा दी जाती थीं? आइए समझते हैं कांग्रेस के इस दोहरे मापदंड (Double Standards) की पूरी कहानी।

जब नेहरू की पसंदीदा सिगरेट के लिए उड़ा था ‘स्पेशल प्लेन’

यह किस्सा साल 1947-48 के आसपास का है। देश नया-नया आज़ाद हुआ था, विभाजन की आग में लाखों लोग बेघर हो चुके थे और देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा रही थी। लेकिन उस दौर में भी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के शौक बेहद महंगे थे। नेहरू ‘555’ ब्रांड की सिगरेट पीने के शौकीन थे।

एक बार पंडित जी भोपाल के दौरे पर थे। भोजन के बाद जब उन्हें उनकी पसंदीदा सिगरेट नहीं मिली, तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में इंदौर से एक विशेष विमान (Special Plane) सिर्फ सिगरेट लेने के लिए भेजा गया। विमान सिगरेट लेकर वापस भोपाल आया, तब जाकर पीएम का शौक पूरा हुआ। टैक्सपेयर का पैसा और देश के संसाधनों का ऐसा इस्तेमाल उस दौर के ‘एलीटिस्ट कल्चर’ को साफ बयां करता है।

लंदन में कपड़े धुलने की कहानियां और ‘एडविना’ संग दोस्ती

नेहरू परिवार की जीवनशैली हमेशा से चर्चा का विषय रही है। जहां एक तरफ महात्मा गांधी देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चरखा चला रहे थे और खादी पहन रहे थे, वहीं नेहरू का मिजाज पूरी तरह अंग्रेजी था। उनके कपड़े धुलने के लिए लंदन या पेरिस भेजे जाने की कहानियां आज भी भारतीय विमर्श का हिस्सा हैं।

इसके अलावा, लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन और नेहरू के बीच की नजदीकियां किसी से छिपी नहीं हैं। एडविना की बेटी पैमेला हिक्स ने अपनी किताब में इसे एक “गहरा भावनात्मक लगाव” बताया है। इतिहासकार इसे बौद्धिक संबंध कहते हैं, तो कुछ इसे अफेयर का नाम देते हैं। कहा जाता है कि नेहरू हर रात 2 बजे तक एडविना को पत्र लिखते थे। यहां तक कि महात्मा गांधी की हत्या वाले दिन भी, जब पूरा देश गहरे शोक में डूबा था, नेहरू और एडविना के साथ रहने के किस्से आज भी इतिहास के गलियारों में तैरते हैं।

‘मेलोडी डिप्लोमेसी’ बनाम नेहरू की अय्याशी: सोशल मीडिया पर वार

आज उसी कांग्रेस को पीएम मोदी द्वारा जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी देना अखर रहा है। वायरल वीडियो में दोनों वैश्विक नेता हंसते हुए मेलोडी नाम का मजाक साझा कर रहे हैं, जो कि एक बेहद सामान्य ‘लाइट-हार्टेड’ डिप्लोमेसी (Soft Diplomacy) का हिस्सा है।

नेहरू का दौर ‘Elitism’ का था, मोदी का दौर ‘Delivery’ का है

कांग्रेस शायद यह भूल जाती है कि नेहरू काल की नीतियों के कारण ही भारत को 1962 में चीन के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी, क्योंकि तब सेना की तैयारियां शून्य थीं। इसके विपरीत, पिछले 10 वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में:

  • भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना।
  • आतंकवाद पर कड़ा प्रहार किया गया।
  • वैक्सीन डिप्लोमेसी के जरिए दुनिया भर में भारत का डंका बजा।
  • आज देश के विमान सिगरेट लाने के लिए नहीं, बल्कि G20, Quad और BRICS जैसे मंचों पर भारत की आवाज मजबूत करने के लिए उड़ान भरते हैं।

निष्कर्ष: अब आईना देखने का समय है

देश अब बदल चुका है और जनता इस प्रकार के दोहरे मापदंडों को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। नेहरू भी एक इंसान थे, उनकी भी कमजोरियां थीं, लेकिन उन्हें ‘देवता’ बनाकर उनकी कमियों को देश से छुपाया गया। आज विकास के नाम पर कांग्रेस के पास कोई ठोस नैरेटिव नहीं बचा है, इसलिए वे टॉफी जैसे मुद्दों पर हंगामा कर रहे हैं। कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने खुद के इतिहास के पन्नों को एक बार जरूर पलट कर देख लेना चाहिए।

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