‘दीदी’ ममता बनर्जी के आए बुरी दिन, सनातन को गंदा धर्म के कहने पर हुआ FIR

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Mamata Banerjee

फोड़ो आभार - The Hindu

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद से ही टीएमसी (TMC) नेताओं के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। कहीं पार्टी दफ्तरों से आपत्तिजनक सामग्री मिल रही है, तो कहीं अभिषेक बनर्जी कानूनी शिकंजे में हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा झटका खुद ममता बनर्जी को लगा है। वोट बैंक की राजनीति और तुष्टिकरण के चक्कर में ममता दीदी ने एक ऐसा बयान दिया जो अब उनके गले की फांस बन गया है।

क्या है पूरा मामला?

ममता बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से ‘सनातन धर्म’ को “गंदा” बता दिया। इस बयान के खिलाफ वकील रिंकी चटर्जी ने सिलीगुड़ी में शिकायत दर्ज कराई है।

  • धार्मिक भावनाएं आहत: शिकायतकर्ता का कहना है कि ममता बनर्जी के इस बयान से करोड़ों हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है।
  • पुराना विवाद, अब कार्रवाई: रिंकी चटर्जी का दावा है कि उन्होंने 2025 में भी शिकायत की कोशिश की थी, लेकिन तब सत्ता के दबाव में उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी बात नहीं सुनी गई।

“हाथ में हाथ मिलाते मुस्लिम नेता और सनातन का अपमान”

जब ममता बनर्जी मंच से सनातन धर्म को कोस रही थीं, तब वहां मौजूद मुस्लिम नेता उनकी बातों पर सहमति जताते हुए खुशी जाहिर कर रहे थे।

सवाल यह उठता है: क्या बीजेपी पर हमला करने के लिए ‘सनातन’ को गाली देना ही एकमात्र रास्ता बचा है? पश्चिम बंगाल जैसी पावन भूमि, जो माँ दुर्गा और माँ काली की भूमि मानी जाती है, वहां खुले मंच से धर्म के अपमान का यह खेल सालों से चल रहा था।

हार का ठीकरा EVM पर, पर असली वजह ‘सनातनी जागरण’

सत्ता से बाहर होने के बाद अब ममता बनर्जी और उनकी पार्टी EVM के साथ छेड़छाड़ और वोटर्स लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा रही हैं। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हार की असली वजह कुछ और है:

  1. जय श्री राम से चिढ़: राज्य में ‘जय श्री राम’ बोलने पर लोगों को जेल में डालना।
  2. तुष्टिकरण की राजनीति: अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देकर राज्य की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश।
  3. हिंदू त्योहारों पर पाबंदी: दुर्गा पूजा विसर्जन और अन्य त्योहारों के समय लगाए गए प्रतिबंध।

जब बंगाल के सनातनी जाग गए और उन्होंने बीजेपी को चुना, तो अब हार को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

उदयनिधि से ममता तक: ‘एंटी-सनातन वायरस’

सनातन धर्म को गाली देना विपक्षी गठबंधन के लिए जैसे एक ‘ट्रेंड’ बन गया है।

  • तमिलनाडु का उदाहरण: उदयनिधि स्टालिन ने सनातन की तुलना ‘मच्छर’ और ‘डेंगू’ से की थी।
  • दक्षिण से पूर्व तक: जो वायरस दक्षिण भारत से शुरू हुआ था, वह अब पूर्व भारत तक फैल चुका है।

विडंबना यह है कि जब बहुसंख्यक समाज के धर्म को गाली दी जाती है, तो उसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ कहा जाता है, लेकिन अगर किसी अन्य समुदाय पर बात हो, तो उसे तुरंत ‘सांप्रदायिक’ करार दे दिया जाता है। पश्चिम बंगाल की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है, लेकिन ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज यह FIR उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट और प्रशासन इस ‘सनातन विरोधी’ बयान पर क्या कार्रवाई करता है।

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