कैबिनेट से छुपाकर मोहम्मद यूनुस ने अमेरिका से की ‘सीक्रेट’ डील, बांग्लादेश में मचा बवाल; जानें क्या है 131 शर्तों का पूरा सच
Muhammad Yunus Secret Deal: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। देश की अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस एक बेहद गंभीर विवाद में घिर गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में अपने ही कैबिनेट मंत्रियों और देश के राष्ट्रपति को पूरी तरह अंधेरे में रखकर अमेरिका के साथ एक ‘सीक्रेट’ ट्रेड डील (व्यापार समझौता) पर हस्ताक्षर किए थे। इस खुलासे के बाद बांग्लादेश के राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
चुनावों से ठीक 3 दिन पहले हुआ गुप्त समझौता
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला बांग्लादेश में हुए आम चुनावों से ठीक तीन दिन पहले यानी 9 फरवरी का है। आरोप है कि मोहम्मद यूनुस ने देश में नई लोकतांत्रिक सरकार के गठन से ठीक पहले इस संवेदनशील समझौते को अंजाम दिया। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस महाडील को ‘नॉन-डिस्क्लोज़र एग्रीमेंट’ (NDA) के तहत साइन किया गया था। इसका सीधा मतलब यह था कि यूनुस सरकार के अपने कैबिनेट मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और यहां तक कि देश के राष्ट्रपति को भी इस बात की भनक नहीं थी कि पर्दे के पीछे देश के भविष्य को लेकर क्या फैसला लिया जा रहा है।
शर्तें ऐसी जिन्हें कहा जा रहा है ‘गुलामी का दस्तावेज’
मोहम्मद यूनुस के सत्ता से हटने के बाद अब उनके बेहद करीबी सूत्रों के हवाले से इस समझौते की जो शर्तें बाहर आ रही हैं, वे बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। इस डील की रूपरेखा पूरी तरह से एकतरफा बताई जा रही है:
- बांग्लादेश पर 131 शर्तें: समझौते के तहत बांग्लादेश को अमेरिका की 131 कड़ी और बाध्यकारी शर्तों को पूरा करना होगा।
- अमेरिका को खुली छूट: इसके विपरीत, महाशक्ति अमेरिका के ऊपर सिर्फ 6 शर्तें ही लागू होंगी।
इस भारी असमानता के कारण ही बांग्लादेश के रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे देश के आर्थिक हितों को गिरवी रखने जैसा मान रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इन शर्तों के कारण बांग्लादेश पूरी तरह से अमेरिकी नीतियों के दबाव में आ जाएगा।
देश की संप्रभुता पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद बांग्लादेश में विपक्ष और नागरिक समाज अंतरिम सरकार के इस कदम पर उग्र हो गए हैं। लोगों का सवाल है कि महज 18 महीने के लिए व्यवस्था संभालने आई एक अंतरिम सरकार को देश के दीर्घकालिक कूटनीतिक और व्यापारिक भविष्य पर बिना किसी संसदीय या कैबिनेट चर्चा के इतना बड़ा फैसला लेने का अधिकार किसने दिया?
बांग्लादेश में अब इस सीक्रेट डील को तुरंत रद्द करने और मोहम्मद यूनुस के इस फैसले के पीछे की मंशा की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग तेजी से पकड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में बांग्लादेश और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ी कड़वाहट की वजह बन सकता है।
