‘दोस्त ने वो काम किया है…’: थलापति विजय के एक पत्र से राहुल गांधी पस्त, मेकेदातु प्रोजेक्ट पर कांग्रेस की उड़ी नींद!
तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और टीवीके (TVK) प्रमुख सी जोसेफ विजय (थलापति विजय) ने अपने दिल्ली दौरे से ठीक पहले एक ऐसा सियासी बम फोड़ा है, जिसने कांग्रेस की पूरी रणनीति को हिलाकर रख दिया है। जिसे कांग्रेस अपना मजबूत साथी मान रही थी, वही अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर कांग्रेस की शिकायत लगाने जा रहा है।
मेकेदातु विवाद: गले मिलने वाले ‘भाई’ ने ही दे दी चुनौती
अभी कुछ ही हफ्ते पहले की बात है जब राहुल गांधी, विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। मंच पर दोनों नेता ‘भाई’ कहकर गले मिले, कांग्रेस ने टीवीके (TVK) को समर्थन दिया और तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक साझेदारी की तस्वीरें चमकाई गईं।
लेकिन राजनीति में ‘भाईचारा’ कितना नाजुक होता है, यह विजय के एक फैसले ने साबित कर दिया। विजय ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेकेदातु जलाशय’ (Mekedatu Dam Project) के खिलाफ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख दी है। विजय ने इसे सुप्रीम कोर्ट और कावेरी ट्रिब्यूनल के आदेशों का सीधा उल्लंघन बताते हुए पीएम मोदी से अपील की है कि इस प्रोजेक्ट की DPR (Detailed Project Report) को तुरंत खारिज किया जाए।
विजय का पत्र और कांग्रेस का दोहरा संकट
विजय ने अपने पत्र में साफ लिखा:
“कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बयान और भूमि पूजा की घोषणा ने तमिलनाडु के किसानों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। कर्नाटक सरकार बिना तमिलनाडु की सहमति के नया जलाशय नहीं बना सकती। लाखों किसानों की आजीविका दांव पर है।”
यह चिट्ठी सिर्फ पानी के हक की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसने कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। अब कांग्रेस एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है जहां उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा:
- कर्नाटक में कांग्रेस सरकार: बेंगलुरु की प्यास बुझाने के नाम पर ₹9,000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को हर हाल में पूरा करना चाहती है।
- तमिलनाडु में कांग्रेस: यहाँ कांग्रेस खुद विजय की सरकार का हिस्सा (गठबंधन में) है, इसलिए वह खुलकर विजय का विरोध भी नहीं कर सकती।
क्या है 9,000 करोड़ का मेकेदातु विवाद?
कावेरी नदी के पानी का विवाद दशकों पुराना है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी दोनों राज्यों में तनातनी खत्म नहीं हुई।
| प्रोजेक्ट का नाम | मेकेदातु जलाशय परियोजना (Mekedatu Project) |
| अनुमानित लागत | लगभग ₹9,000 करोड़ |
| पानी भंडारण क्षमता | 67 TMC (Thousand Million Cubic Feet) |
| कर्नाटक का तर्क | बेंगलुरु शहर के लिए पीने के पानी की आपूर्ति और बिजली उत्पादन। |
| तमिलनाडु का डर | नया बांध बनने से तमिलनाडु के निचले इलाकों में पानी रुकेगा और फसलें सूख जाएंगी। |
राहुल गांधी के ‘दक्षिण किले’ में लगी सेंध
राहुल गांधी पिछले काफी समय से दक्षिण भारत के जरिए कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिशों में जुटे थे। विजय के साथ गठबंधन को इसी मास्टरप्लान का हिस्सा माना जा रहा था। लेकिन अब विजय के इस कदम से कर्नाटक कांग्रेस इसे ‘पीठ में छुरा घोंपने’ जैसा मान रही है, जबकि तमिलनाडु के किसान विजय को अपना ‘हीरो’ मानकर जश्न मना रहे हैं।
विजय ने साफ तौर पर केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग (CWC) से मांग की है कि बिना डाउनस्ट्रीम राज्यों (निचले राज्यों) की लिखित सहमति के कोई भी नया प्रोजेक्ट आगे न बढ़ाया जाए।
सियासी मैदान में अब शुरू हुआ असली खेल
दिल्ली में मुख्यमंत्री विजय की मुलाकात पीएम मोदी से तय मानी जा रही है। अगर केंद्र सरकार ने इस मामले में तमिलनाडु के पक्ष में जरा सा भी झुकाव दिखाया, तो कांग्रेस के लिए दोनों राज्यों को संभालना नामुमकिन हो जाएगा। कर्नाटक कांग्रेस जहां विजय पर हमलावर होगी, वहीं तमिलनाडु कांग्रेस अपने ही साथी और अपनी ही राज्य सरकार के बीच फुटबॉल बनकर रह जाएगी।
साफ है कि जब राजनीतिक हित टकराते हैं, तो मंच के गले शिकवे और ‘भाईचारा’ धरे के धरे रह जाते हैं। थलापति विजय का यह वार सीधा है, सटीक है और सही समय पर है, जिसने राहुल गांधी के ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपनों’ को बड़ा झटका दिया है।
