सिर्फ 4 दिन और 1 करोड़ फॉलोअर्स,  ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की सच्चाई क्या है?

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक पेज तूफान की तरह वायरल हो रहा है। महज 4-5 दिनों के भीतर 1 करोड़ (10 मिलियन) से ज्यादा फॉलोअर्स का आंकड़ा पार करने वाले इस पेज को देश का Gen-Z (युवा पीढ़ी) एक ‘कूल मीम ट्रेंड’ समझकर फॉलो कर रहा है। लेकिन डिजिटल एक्सपर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या यह वाकई युवाओं का एक स्पॉन्टेनियस आंदोलन है, या फिर इसके पीछे इस सदी का सबसे बड़ा डिजिटल प्रोपेगैंडा और कोई सुनियोजित ‘टूलकिट’ काम कर रही है? इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की घटनाक्रम का सिलसिला को करीब से देखने पर कई गंभीर सवाल उठते हैं।

फाउंडर अभिजीत दिपके का ‘AAP’ कनेक्शन

खुद को सोशल मीडिया पर पूरी तरह निष्पक्ष दिखाने वाले इस पेज के पीछे कोई साधारण छात्र नहीं, बल्कि एक बेहद शातिर ‘पॉलिटिकल Communication स्ट्रैटजिस्ट’ का दिमाग माना जा रहा है। CJP का फाउंडर अभिजीत दिपके है। जब उसके पुराने बैकग्राउंड को खंगाला गया, तो पता चला कि वह आम आदमी पार्टी के एक पुराने और मंझे हुए सोशल मीडिया वॉलंटियर रहा है। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP के लिए मीम-बेस्ड नैरेटिव सेट करने का काम इसने ही संभाला था।

पार्टी लॉन्च और बड़े नेताओं का समर्थन

संयोग और प्रयोग के इस खेल को समझने के लिए तारीखों की इस क्रोनोलॉजी पर गौर करना जरूरी है।

  • 16 मई: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) की एक टिप्पणी के बाद इस पेज को आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन लॉन्च किया जाता है।
  • 17 मई: लॉन्चिंग के ठीक अगले ही दिन विपक्ष के बड़े-बड़े नेता, महुआ मोइत्रा से लेकर मनीष सिसोदिया तक, इस पेज को प्रमोट करने और इसके समर्थन में पोस्ट करने लगते हैं।

मनीष सिसोदिया ने तो बाकायदा वीडियो रील्स बनाकर इसका खुला समर्थन किया। अब सवाल यह उठता है कि क्या देश के बड़े नेताओं के पास किसी रैंडम मीम पेज को ऑफिशियल सपोर्ट देने का इतना फालतू समय है, या फिर इसकी स्क्रिप्ट पहले से ही पूरी तरह तैयार थी?

Gen-Z है टारगेट करना 

इस अभियान का सबसे रणनीतिक हिस्सा देश की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z को निशाना बनाना है। आज की युवा पीढ़ी इंस्टाग्राम पर रील्स और मीम्स के जरिए ही दुनिया और देश के मुद्दों को देखती-समझती है। इस मनोवैज्ञानिक नब्ज को ये पॉलिटिकल स्ट्रैटजिस्ट बखूबी जानते हैं।

देश में जब भी कोई गंभीर मुद्दा होता है, जैसे हाल ही में NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक को लेकर देश के छात्रों में भारी और जायज गुस्सा था, तो उस गुस्से का सकारात्मक समाधान ढूंढने के बजाय, उसे सिस्टम के खिलाफ मोड़ने की कोशिशें तेज हो जाती हैं। युवाओं को लग रहा है कि यह पेज उनके हक की आवाज उठा रहा है, लेकिन आरोप है कि मीम्स की आड़ में उनके दिमाग में ‘एंटी-गवर्नमेंट’ और ‘एंटी-सिस्टम’ का नैरेटिव सेट किया जा रहा है। कूल दिखने के चक्कर में देश का Gen-Z अनजाने में एक राजनीतिक दल का डिजिटल मोहरा बनता दिख रहा है।

संचालन और फंडिंग पर गंभीर सवाल

अभिजीत दिपके इस वक्त भारत में नहीं, बल्कि अमेरिका में बैठकर यह पूरा डिजिटल खेल संचालित कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल भी लाजिमी है कि जो व्यक्ति खुद देश के सिस्टम और कानूनी सीमाओं से बाहर सुरक्षित बैठा है, वह भारत के युवाओं को व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह करने या सड़कों पर उतरने के लिए क्यों उकसा रहा है?

डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का स्पष्ट मानना है कि बिना किसी भारी-भरकम पेड प्रमोशन, सिंडिकेट नेटवर्क या ‘बॉट फार्म्स’ (फर्जी या ऑटोमेटेड अकाउंट्स की मदद) के, महज 4-5 दिनों के भीतर 10 मिलियन यानी 1 करोड़ फॉलोअर्स हासिल करना ऑर्गेनिक तरीके से नामुमकिन है। इसके पीछे एक बहुत बड़ी फंडिंग और स्थापित पीआर (PR) मशीनरी काम कर रही है।

पुराना विवादित रिकॉर्ड और बढ़ता संदेह

जैसे-जैसे कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा बढ़ रही है, वैसे-वैसे अभिजीत दिपके के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स भी वायरल हो रहे हैं। इन पोस्ट्स में कश्मीर को लेकर की गई उनकी विवादित टिप्पणियां और CAA-NRC के विरोधियों का खुला समर्थन शामिल है। कुछ रिपोर्ट्स में तो अलगाववादियों को सपोर्ट करने के मामले में उन पर पूर्व में केस दर्ज होने का दावा भी किया जा रहा है।

इस पेज को सपोर्ट करने वाले इन्फ्लूएंसर्स के प्रोफाइल को देखें, तो उनमें से अधिकांश वही हैं जो अक्सर विपक्षी एजेंडे को बढ़ावा देते हैं। आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं और इस ‘कॉकरोच पार्टी’ की भाषा और तेवरों में गजब की समानता देखने को मिल रही है, जिससे यह संदेह गहरा गया है कि क्या यह आगामी चुनावों से पहले जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोई बड़ी साजिश तो नहीं है?

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