जापान में हुआ ‘मस्जिद’ कांड तो पाकिस्तान में क्यों मच गया बवाल?
पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान या आर्थिक संकट नहीं, बल्कि जापान में एक मस्जिद को लेकर खड़ा हुआ विवाद है। जिस मस्जिद का उद्घाटन पाकिस्तान के राजदूत ने कुछ समय पहले किया था, अब वही मस्जिद कानूनी विवादों में घिर गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की कूटनीतिक छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक इसकी चर्चा हो रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद जापान के सैतामा प्रांत के कावागोए शहर से जुड़ा हुआ है। यहां करीब 4,500 वर्ग मीटर जमीन पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया था। इसी साल अप्रैल में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद ने इस मस्जिद का औपचारिक उद्घाटन भी किया था। लेकिन अब स्थानीय प्रशासन का दावा है कि मस्जिद का निर्माण आवश्यक सरकारी अनुमति के बिना किया गया है।
कावागोए सिटी हॉल के अनुसार, जिस क्षेत्र में यह मस्जिद बनाई गई है वहां निर्माण कार्य के लिए नगर नियोजन अधिनियम के तहत विशेष अनुमति लेना अनिवार्य था। प्रशासन का कहना है कि निर्माण से पहले ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर मस्जिद को हटाने की मांग उठने लगी है और इस पर विचार किया जा रहा है।
प्रशासन ने क्या कहा?
स्थानीय प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि संबंधित भवन ऐसे क्षेत्र में बनाया गया है जहां विशेष मंजूरी के बिना निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारियों के मुताबिक निर्माण कार्य शहर प्रशासन की स्वीकृति के बिना किया गया, जो जापान के नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
पाकिस्तान क्यों घिर गया?
विवाद इसलिए और बड़ा हो गया क्योंकि मस्जिद के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के राजदूत स्वयं शामिल हुए थे। ऐसे में मामला केवल स्थानीय निर्माण नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान की कूटनीतिक छवि से भी जुड़ गया।
पाकिस्तान दूतावास की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद पाकिस्तान दूतावास ने अपना पक्ष भी रखा है। दूतावास का कहना है कि वो 3 अप्रैल को उद्घाटन समारोह में इसलिए शामिल हुए थे क्योंकि उन्हें बताया गया था कि परियोजना के लिए सभी आवश्यक कानूनी मंजूरियां प्राप्त कर ली गई हैं।
दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी ऐसी गतिविधि का समर्थन नहीं करता जो स्थानीय कानूनों के विरुद्ध हो। साथ ही संबंधित समुदाय और परियोजना से जुड़े लोगों से जापानी अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करने तथा स्थानीय नियमों का पालन करने की अपील की गई है।
जापान में क्यों गंभीर माना जा रहा है मामला?
जापान में निर्माण कार्यों को लेकर बेहद सख्त नियम लागू हैं। किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक भवन के निर्माण के लिए स्थानीय प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होता है। नियमों के उल्लंघन को वहां गंभीरता से लिया जाता है।
इसी कारण यह विवाद केवल एक इमारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे पाकिस्तान की छवि भी प्रभावित हुई है। राजदूत की मौजूदगी ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर चर्चा हो रही है।
