खान सर की कोचिंग के बाहर फायरिंग का दावा निकला झूठा? CCTV फुटेज के बाद यू-टर्न पर उठे सवाल
Khan Sir’s coaching institute vandalize: सोशल मीडिया और देश के सबसे चर्चित शिक्षकों में से एक, खान सर (Khan Sir) एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। मंगलवार रात पटना स्थित उनके कोचिंग सेंटर के बाहर कथित तौर पर हुई फायरिंग के मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस जांच और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सामने आने के बाद खान सर के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसके बाद उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी है।
खान सर का शुरुआती दावा
मंगलवार की रात करीब 10 बजे खान सर की कोचिंग के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद मीडिया से बात करते हुए खान सर ने ऑन-कैमरा दावा किया कि उन्होंने खुद अपनी आंखों से मौके पर खड़े होकर 8 से 10 राउंड गोलियां चलते देखी हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने इस घटना को ‘कोचिंग वॉर’ का हिस्सा बताते हुए एक दूसरे कोचिंग संचालक पर आरोप मढ़ दिया। खान सर का दावा था कि उन्हें दो दिन पहले ही कोचिंग को उड़ाने की धमकी दी गई थी। देश के इतने बड़े शिक्षक द्वारा सीधा आरोप लगाए जाने के बाद बिहार पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई।
पुलिस जांच में दावों की खुली पोल, CCTV में कोई फायरिंग नहीं
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारी भारी बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। जब पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आसपास के दुकानदारों व चश्मदीदों से पूछताछ की, तो सच्चाई खान सर के दावों से बिल्कुल उलट निकली। पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, न तो सीसीटीवी फुटेज में कोई फायरिंग होती दिखी और न ही किसी स्थानीय व्यक्ति ने गोली चलने की आवाज सुनी। पुलिस ने साफ कर दिया कि कोचिंग के बाहर किसी भी तरह की फायरिंग की घटना नहीं हुई है।
खान सर का ‘U-Turn’
CCTV फुटेज और पुलिस रिपोर्ट के बाद चौतरफा घिरे खान सर अपने दिए गए बयान से पलटते नजर आए। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि रात के वक्त माहौल इतना तनावपूर्ण था और इतनी अफरा-तफरी मची थी कि वह सही तरीके से स्थिति को समझ नहीं पाए।
खान सर की सफाई
“माहौल तनावपूर्ण होने के कारण चीजों को समझने में गलतफहमी हुई।” –
छात्रों का प्रदर्शन
खान सर के इस शुरुआती बयान का असर यह हुआ कि आज पटना की सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्र उतर आए। छात्रों ने सड़क जाम कर दी है और खान सर के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं। अब सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर इतने जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति ने बिना पुष्टि के इतना बड़ा दावा क्यों किया? क्या यह अपने खिलाफ चल रहे किसी नैरेटिव को दबाने के लिए ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने की कोशिश थी? अपनी निजी या व्यावसायिक लड़ाई (Coaching War) के लिए मासूम छात्रों की भावनाओं को भड़काना और उनके भविष्य को दांव पर लगाना कितना सही है? फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
