ममता बनर्जी ने दिल्ली प्रदर्शन पर उठाए सवाल, सोशल मीडिया पर पुराने आरोपों की भी हुई चर्चा

0
ChatGPT Image Jul 21, 2026, 09_12_12 PM

राजधानी दिल्ली में संसद भवन मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस-प्रदर्शनकारियों की झड़प के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। वहीं, सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। कई यूज़र्स ने पश्चिम बंगाल में अतीत की राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं।

संसद मार्च के दौरान क्या हुआ?

20 जुलाई को संसद भवन मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ और धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प दिखाई दे रही है।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा “मैं आज दिल्ली में हमारे युवाओं और छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा करती हूँ। यह कैसी सरकार है जो अपने ही छात्रों से डरती है? यह कैसा लोकतंत्र है जहाँ सवालों का जवाब बातचीत के बजाय लाठी और आँसू गैस से दिया जाता है?”

उन्होंने आगे लिखा “यह देश यहाँ के छात्रों, किसानों, महिलाओं, मज़दूरों और हर नागरिक का है। असहमति जताना कोई अपराध नहीं है। बर्बरता शासन नहीं है। मैं अपने युवा भाई-बहनों के साथ मज़बूती से खड़ा हूँ। जवाबदेही ज़रूरी है। मैं उन सभी के साहस, मज़बूती और अटूट जज़्बे को सलाम करती हूँ। उन्होंने देश को दिखाया है कि निडरता क्या होती है।”

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन करते हुए प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की बात की, जबकि अन्य यूज़र्स ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा, विपक्षी दलों के आरोपों और कानून-व्यवस्था से जुड़े पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए उनकी टिप्पणी की आलोचना की।

Leave a Reply

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading