ब्रिटेन में बड़ा सत्ता परिवर्तन: ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ एंडी बर्नहैम बने नए प्रधानमंत्री, क्या रोक पाएंगे ‘रिवॉल्विंग डोर’ का सिलसिला?
यूनाइटेड किंगडम (UK) की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। सिर्फ 10 साल के भीतर ब्रिटेन को उसका 7वां प्रधानमंत्री मिल चुका है। यानी हर डेढ़-दो साल में 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक नई नाम पट्टिका लग जाती है। 20 जुलाई यानी आज बकिंघम पैलेस में किंग चार्ल्स III से मुलाकात के बाद एंडी बर्नहैम आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड किंगडम के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।
ब्रिटिश परंपरा में इस ऐतिहासिक पल को ‘किसिंग हैंड्स’ (Kissing Hands) कहा जाता है। इस रस्म के दौरान किंग चार्ल्स ने बर्नहैम को नई सरकार बनाने का न्यौता दिया, जिसे उन्होंने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया।
कीर स्टार्मर की विदाई और बर्नहैम का उदय
अभी महज दो साल पहले ही लेबर पार्टी के कीर स्टार्मर भारी बहुमत के साथ सत्ता में आए थे। लेकिन पिछले कुछ समय से देश की राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद लेबर पार्टी ने बिना किसी आंतरिक विरोध के एंडी बर्नहैम को सर्वसम्मति से अपना नया लीडर चुन लिया।
असल में, साल 2016 में ब्रेक्सिट (Brexit) के फैसले के बाद से ब्रिटेन की राजनीति एक ‘रिवॉल्विंग डोर’ बन चुकी है। इस दौरान देश ने जो उथल-पुथल देखी है, उसने एक के बाद एक कई प्रधानमंत्रियों की कुर्सी छीन ली है।
कौन हैं एंडी बर्नहैम? जिन्हें जनता कहती है ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’
ब्रिटेन की जनता के बीच एंडी बर्नहैम की छवि एक पारंपरिक ब्रिटिश नेता जैसी नहीं है। वे ग्रेटर मैनचेस्टर के बेहद लोकप्रिय पूर्व मेयर हैं और लोग उन्हें प्यार से ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहते हैं।
- आम जनता से जुड़ाव: बर्नहैम पारंपरिक नेताओं की तरह सिर्फ सूट-बूट में नजर नहीं आते; वे अक्सर टी-शर्ट पहनते हैं और वर्किंग-क्लास यानी आम जनता के हक की मुखर आवाज माने जाते हैं।
- रॉकस्टार पीएम: राजनीति के अलावा, बर्नहैम मैनचेस्टर के म्यूजिक सर्किट्स में एक डीजे (DJ) के रूप में भी जाने जाते हैं। यही वजह है कि युवा उन्हें एक ‘फुल-ऑन रॉकस्टार पीएम’ के रूप में देख रहे हैं।
बर्नहैम का विजन: राजनीति के लिए ‘सर्किट ब्रेकर’
10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में एंडी बर्नहैम ने देश के सामने अपना रोडमैप रखा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ब्रिटेन के लिए एक ‘सर्किट ब्रेकर’ की तरह काम करेगी। उनके मुख्य एजेंडे निम्नलिखित हैं:
- राजनीतिक शुचिता: देश की राजनीति को कम टॉक्सिक (जहरीला) बनाना।
- निजीकरण पर रोक: पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्राइवेटाइजेशन को रोकना और उसे आम जनता के लिए सुलभ बनाना।
- सत्ता का विकेंद्रीकरण: सत्ता को सिर्फ लंदन के गलियारों तक सीमित न रखकर पूरे देश (विशेषकर उत्तरी हिस्सों) में समान रूप से बांटना।
डगमगाती अर्थव्यवस्था और डोनाल्ड ट्रंप की चुनौती
भले ही बर्नहैम के आने से समर्थकों में उत्साह है, लेकिन उनका रास्ता कांटों भरा है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ब्रिटेन की सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने की है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उनकी राह आसान नहीं होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्नहैम के पीएम बनने से पहले ही उन्हें ‘बेहद लिबरल’ कहकर संबोधित किया है, जिससे साफ है कि आने वाले समय में दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ ब्रिटेन की डूबती नैया पार लगा पाएंगे और देश में राजनीतिक स्थिरता ला पाएंगे, या फिर वे भी इस ‘रिवॉल्विंग डोर’ का अगला शिकार बनेंगे।
