NEET प्रदर्शन या Regime Change की साज़िश? पर्दे के पीछे के चेहरों का सच
शायद आपके भी सोशल मीडिया की फ़ीड जंतर-मंतर के प्रोटेस्ट से भर गई होगी। उनमें लगातार यह दिखाया जा रहा होगा कि मोदी सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म कर दिया है। पीएम मोदी को गालियाँ भी दी जा रही हैं। कई ऐसे वीडियो भी दिखाए जा रहे हैं, जिन्हें काट-छाँटकर यह पेश किया जा रहा है कि इन लोगों के ऊपर ज्यादती की जा रही है।
लेकिन यह कोई नहीं दिखाएगा कि उस प्रदर्शन में सरकार गिराने की बातें कही जा रही हैं, Regime Change की बातें हो रही हैं और नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने वाले नारे लगाए जा रहे हैं।
पर्दे के पीछे के मुख्य चेहरे
Feroze Mithiborwala और Sudhir Dhawale—ये वो लोग हैं, जो इस प्रोटेस्ट की रूपरेखा तय कर रहे थे। यहाँ सिर्फ़ प्रोटेस्ट की भूमिका नहीं, बल्कि Regime Change का ताना-बाना बुना जा रहा था।
आपकी स्क्रीन पर जो शख्स दिख रहा है, उसका नाम है Feroze Mithiborwala। इसका पूरा सोशल मीडिया फुटप्रिंट CJP के उन वीडियो से भरा हुआ है, जिनसे देश में दंगे जैसे माहौल बन सकें। यह वही इंसान है, जो संगठन Hum Bharat Ke Log (We the People of India) का वाइस प्रेसिडेंट है। इस संगठन ने CAA-NRC विरोधी आंदोलन को हवा दी थी—वही प्रदर्शन, जिसकी परिणति दिल्ली के दंगों के रूप में हुई। इतना ही नहीं, यह फ़िलिस्तीन के लिए आँसू बहाता है और Palestine Solidarity Forum का निर्माण करता है। साल 2010 में यही Feroze, Hamas के नेता Khaled से मिलता है और उनसे वादा करता है कि उनका संगठन भारत में एक ऐसा सिस्टम बनाएगा, जो Zionist Activities को ट्रैक और मॉनिटर करेगा। आज यही लोग अपने सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसे वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिनसे देश का माहौल बिगाड़ा जा सके।
इसके बाद बात करते हैं सुधीर धावले की। आपको 1 जनवरी 2018 को पुणे में हुई जातीय हिंसा का भीमा कोरेगांव केस याद ही होगा, जिसमें सुधीर धावले का नाम प्रमुखता से सामने आया था। आज वही सुधीर ज़मानत पर बाहर है और महाराष्ट्र में “संसद चलो” प्रदर्शन के नाम पर युवाओं को पथभ्रष्ट कर रहा है। जो इंसान पहले ही एक प्रोटेस्ट को हिंसा में बदल चुका है, वही अब दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन के लिए महाराष्ट्र में जनाक्रोश पैदा कर रहा है। ख़ुद को फ़्रीलांस पत्रकार और कवि बताने वाले इस सुधीर का सोशल मीडिया अकाउंट सिर्फ़ और सिर्फ़ विरोध प्रदर्शनों के वीडियो और तस्वीरों से भरा पड़ा है, जिनका मक़सद सिर्फ़ देश का माहौल एंटी-मोदी बनाना है।
विरोध जायज़ है, लेकिन सीमा कहाँ है?
फिर भी अगर आप कहेंगे कि ये प्रोटेस्ट जायज़ हैं, तो मैं भी कहूँगा – हाँ, जायज़ हैं!
लेकिन यह विरोध सिर्फ़ NEET पेपर लीक के मुद्दे तक जायज़ है। यह Regime Change की साज़िशों तक जायज़ नहीं है। यह अनुच्छेद 370 और ट्रांसजेंडर बिल पर राजनीति करने तक जायज़ नहीं है। यह “नाम रहेगा अल्लाह का” और “सीता के पति और नीता के पति” जैसे विवादित नारों तक जायज़ नहीं है।
NEET का मुद्दा पूरी तरह से जायज़ है, लेकिन छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की बात करना किसी भी क़ीमत पर जायज़ नहीं है।
