UPI पेमेंट करने वालों के लिए बड़ी खबर: ₹10,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर लगेगा ‘ब्रेक’?
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आज के दौर में चाय की टपरी हो या बड़ा शॉपिंग मॉल, हम हर जगह UPI (Unified Payments Interface) का इस्तेमाल बड़ी तेजी से करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी इसी रफ्तार पर अब लगाम लग सकती है? RBI एक ऐसा नियम लाने की तैयारी में है, जिससे आपका ऑनलाइन पेमेंट तुरंत क्रेडिट होने के बजाय 1 घंटे की देरी से पहुंचेगा।
आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्यों बैंक इसका विरोध कर रहे हैं।
क्यों पड़ सकता है डिजिटल पेमेंट पर ‘ब्रेक’?
ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर स्कैम के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- 1 घंटे का टाइम लैग: अगर आप ₹10,000 से अधिक का डिजिटल ट्रांजैक्शन करते हैं, तो पैसा तुरंत सामने वाले के खाते में नहीं पहुंचेगा। इसमें 1 घंटे की देरी (Time Lag) रखी जा सकती है।
- मकसद: इस समय का उपयोग यूजर अपने ट्रांजैक्शन को रिव्यू करने के लिए कर सकता है। अगर किसी के साथ धोखा हुआ है, तो वह उस 1 घंटे के भीतर ट्रांजैक्शन को रोकने या रिपोर्ट करने की स्थिति में होगा।
साइबर फ्रॉड के आंकड़े
RBI के इस कड़े कदम के पीछे की वजह 2025 के आंकड़े हैं, जो काफी चिंताजनक हैं. पिछले एक साल में कुल साइबर फ्रॉड के 28 लाख से ज़्यादा के मामले आएँ. और डूबी हुई राशि है – ₹22,000।

इतने बड़े पैमाने पर हो रही वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए अब ‘स्पीड’ से ज्यादा ‘सुरक्षा’ को प्राथमिकता दी जा रही है।
बैंकों को क्यों है ऐतराज?
RBI के इस प्रस्ताव पर बैंकिंग सेक्टर में हलचल मच गई है। कई बैंकर्स ने इस पर असहमति जताई है। उनके तर्क कुछ इस प्रकार हैं:
- लिमिट बहुत कम है: बैंकर्स का कहना है कि ₹10,000 की लिमिट वर्तमान खर्चों के हिसाब से बहुत कम है। इसे बढ़ाकर कम से कम ₹25,000 करना चाहिए।
- इमरजेंसी में दिक्कत: अस्पताल के बिल, दवाइयों या किसी अन्य जरूरी काम के लिए तुरंत पेमेंट की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में 1 घंटे की देरी बड़ी मुसीबत बन सकती है।
- डिजिटल इंडिया की रफ्तार: भारत ने दुनिया भर में सबसे तेज डिजिटल पेमेंट सिस्टम का लोहा मनवाया है। इस नियम से उस ‘सुविधा’ और ‘यूजर एक्सपीरियंस’ पर बुरा असर पड़ सकता है।
क्या यह नियम आपके लिए सिरदर्द बनेगा?
सुरक्षा के नजरिए से देखें तो यह एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है, लेकिन तात्कालिक जरूरत (Immediate Need) के मामले में यह थोड़ा परेशान करने वाला हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय: अगर यह नियम लागू होता है, तो फ्रॉड करने वालों के लिए तुरंत पैसा निकालकर गायब होना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि, आम जनता को अपनी पेमेंट की आदतों में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।
