PAK की मध्यस्थता फेल: आर्मी चीफ मुनीर और मंत्री नकवी की ‘तेहरान दौड़’ भी नहीं रोक सकी अमेरिका-ईरान टकराव

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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध के बादलों को छंटवाने और महाशक्तियों के बीच बीच-बचाव करने की पाकिस्तान की कोशिशें पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने आनन-फानन में ईरान की राजधानी तेहरान का दौरा किया था, लेकिन दोनों देशों के कड़े रुख के आगे इस्लामाबाद की यह मध्यस्थता (Mediation) औंधे मुंह गिर गई है।

इस विफलता के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में तनाव चरम पर है और दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं।

क्यों फेल हुई जनरल मुनीर की तेहरान यात्रा?

अपनी तेहरान यात्रा के दौरान पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी नेताओं से मुलाकात कर अमेरिका के साथ सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा था। पाकिस्तान खुद को एक ‘विश्वसनीय मध्यस्थ’ के तौर पर पेश कर रहा था, क्योंकि ईरान उसका पड़ोसी है और अमेरिका उसका पुराना सहयोगी।

हालांकि, बातचीत के दौरान ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अमेरिका उस पर से आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाता और होर्मुज पर उसके नियंत्रण को स्वीकार नहीं करता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिका के सख्त रुख (ट्रंप प्रशासन) ने पाकिस्तान की इस मध्यस्थता को पर्याप्त मानने से इनकार कर दिया। वॉशिंगटन का साफ कहना है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय हमलों को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक उस पर दबाव जारी रहेगा।

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टिकी हैं दुनिया की नजरें

दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में छोटे-छोटे सैन्य टकराव काफी बढ़ गए हैं। ईरान ने कई बार धमकी दी है कि अगर अमेरिकी दबाव बढ़ा तो वह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद कर देगा—जो दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे जीवन रेखा (Lifeline) माना जाता है। जवाब में अमेरिका ने ईरान के ‘बंदर अब्बास’ समेत कई प्रमुख सैन्य ठिकानों पर हाल ही में हवाई हमले किए थे। ईरान ने भी पलटवार में ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं।

दोहरी मुश्किल में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय वैश्विक कूटनीति में बेहद नाजुक और दोहरी स्थिति में फंसा है। उसे जहां एक तरफ अपनी सीमाओं की सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए पड़ोसी देश ईरान की जरूरत है, वहीं बदहाल अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए अमेरिका से मिलने वाली वित्तीय और सैन्य सहायता पर भी निर्भर रहना पड़ता है। पाकिस्तानी मीडिया और रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस विफलता से वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की कूटनीतिक साख को बड़ा झटका लगा है।

पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा

पाकिस्तानी मध्यस्थता के फेल होने के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत का खतरा और गहरा हो गया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस रूट पर तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत, चीन और यूरोप समेत दुनिया के कई देशों की तेल आपूर्ति पर पड़ेगा। अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, तो इसका खामियाजा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भुगतना होगा। इस विफलता से यह भी साफ हो गया है कि इस बड़े विवाद में पाकिस्तान जैसे देशों की भूमिका बेहद सीमित है, और अब इस संकट में चीन या रूस की एंट्री हो सकती है।

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