ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ‘महायुद्ध’: फोन पर तीखी बहस, आखिर क्यों गुस्से से लाल हुए इजरायली पीएम?
मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी भारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर भयंकर ‘हॉट टॉक’ हुई है। दोनों नेताओं के बीच लगभग 30 मिनट से ज़्यादा देर तक चली इस बातचीत में माहौल बेहद गर्म रहा और दोनों ने एक-दूसरे को जमकर खरी-खोटी सुनाई। इस तीखी बहस के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में कोई बड़ी दरार आ चुकी है? आखिर ऐसा क्या हुआ कि इजरायली प्रधानमंत्री गुस्से से लाल हो गए?
30 मिनट की ‘हॉट टॉक’ और नेतन्याहू का गुस्सा
यह पूरी घटना मंगलवार की है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को फोन किया था। इस कॉल का मुख्य उद्देश्य इजरायल को समझाना और उसे ईरान के साथ युद्ध को आगे न बढ़ाने के लिए राजी करना था। अमेरिका चाहता है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो, लेकिन ट्रंप की यह सलाह नेतन्याहू को बिल्कुल पसंद नहीं आई और वे बुरी तरह भड़क गए।
बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को दो टूक जवाब देते हुए कहा “ईरान पर किसी भी कीमत पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह बातचीत का नाटक करके सिर्फ समय बर्बाद कर रहा है। इतिहास गवाह है कि युद्ध बार-बार नहीं होते, इसलिए हमें इस खतरे को अभी खत्म करना होगा।” नेतन्याहू के इस कड़े रुख से साफ है कि वे ईरान को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेलने के मूड में हैं और किसी भी तरह के शांति समझौते के पक्ष में नहीं हैं।
ट्रंप की दो टूक
नेतन्याहू के इस गुस्से और अड़ियल रवैये पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में इजरायली पीएम को अमेरिका की वैश्विक प्राथमिकताओं का अहसास कराया।
- अमेरिका की प्राथमिकता: ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मिडिल ईस्ट में सिर्फ इजराइल ही अमेरिका की एकमात्र प्राथमिकता नहीं है। अमेरिका को अपने वैश्विक और आर्थिक हितों को भी देखना है।
- कतर के साथ सीक्रेट डील: ट्रंप ने फोन पर एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए कतर के साथ मिलकर एक विशेष समझौते (Peace Deal) पर तेजी से काम चल रहा है।
इस शांति समझौते की खबर ने नेतन्याहू की नाराजगी को और बढ़ा दिया। इजरायल को डर है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली कोई भी डील उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।
आखिर क्यों जंग की राह पर अड़े हैं नेतन्याहू? ये हैं 3 बड़े कारण
राजनीतिक विश्लेषकों और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू द्वारा शांति के प्रयासों को ठुकराकर युद्ध की जिद पर अड़े रहने के पीछे 3 मुख्य और बड़े कारण हैं:
- समझौते में ईरान का भारी पलड़ा: अमेरिका, कतर और ईरान के बीच जो समझौता आकार ले रहा है, उसमें ईरान मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। यह इजराइल के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक और कूटनीतिक झटका है, जिसे नेतन्याहू पचा नहीं पा रहे हैं।
- घरेलू राजनीति और गिरती लोकप्रियता: इजरायल के भीतर इस वक्त नेतन्याहू चौतरफा घिरे हुए हैं। नफ्ताली बेनेट जैसे आक्रामक विपक्षी नेता लगातार नेतन्याहू की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में नेतन्याहू को लगता है कि युद्ध के जरिए वे देश में राष्ट्रवाद की लहर पैदा कर अपनी गिरती लोकप्रियता को दोबारा हासिल कर सकते हैं।
- ईरान की कमजोरी का फायदा उठाना: इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस वक्त ईरान के शीर्ष नेता आंतरिक और बाहरी मोर्चों पर कमजोर हैं और उनकी सेना भी लड़खड़ाई हुई है। नेतन्याहू इस ‘आपदा को अवसर’ में बदलना चाहते हैं ताकि ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमता को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद किया जा सके।
क्या डोनाल्ड ट्रंप रोक पाएंगे महायुद्ध?
इस हाई-प्रोफाइल फोन कॉल ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट के दलदल में और गहरा नहीं फंसना चाहता, जबकि इजरायल आर-पार की लड़ाई के मूड में है। डोनाल्ड ट्रंप के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे कूटनीति के बल पर अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी इजरायल को कैसे नियंत्रित करते हैं। यदि इजरायल ने अमेरिकी चेतावनी को नजरअंदाज कर ईरान पर बड़ा हमला किया, तो मिडिल ईस्ट में एक ऐसा महायुद्ध छिड़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
