अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट क्रैश: 11 महीने बाद चश्मदीद का खुलासा, क्या कैप्टन को फंसाने के लिए रचा गया था ‘अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव’?
अहमदाबाद: 12 जून 2025 की वो सुबह भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक थी। अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 टेक-ऑफ के मात्र 36 सेकंड बाद क्रैश हो गई। इस भीषण हादसे में 260 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं। लेकिन हादसे के 11 महीने बाद, एक चश्मदीद के बयान ने इस पूरी घटना की जांच और विदेशी मीडिया के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
विदेशी मीडिया का ‘पायलट-ब्लेम’ नैरेटिव
हादसे के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों ने एक सुर में कैप्टन सुमित सभरवाल को दोषी ठहराना शुरू कर दिया था।
- Wall Street Journal ने रिपोर्ट दी कि ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग के अनुसार कैप्टन ने खुद ‘फ्यूल कंट्रोल स्विच’ बंद किए।
- Reuters, Bloomberg, CNN और New York Post ने भी इसी सुर में सुर मिलाया।
- भारतीय मीडिया के एक धड़े ने भी बिना किसी स्वतंत्र जांच के इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया।
नतीजा यह हुआ कि सारा ध्यान विमान निर्माता कंपनी बोइंग (Boeing) की संभावित तकनीकी खामियों से हटकर पूरी तरह से ‘ह्यूमन एरर’ यानी पायलट की गलती पर केंद्रित हो गया।
रोमिन वोहरा का सनसनीखेज खुलासा
हादसे के 11 महीने बाद, रोमिन वोहरा (जिन्होंने इस हादसे में अपने तीन परिजनों को खोया) ने जो देखा, वह विदेशी मीडिया की थ्योरी को पूरी तरह ध्वस्त करता है। रोमिन ने मॉर्चरी में कैप्टन सभरवाल के शव को करीब से देखा था।
“कैप्टन का शव सीट पर बैठने की स्थिति (Sitting Position) में था। उनके हाथ विमान के स्टीयरिंग कंट्रोल को पूरी मजबूती से जकड़े हुए थे। उनके शरीर का पिछला हिस्सा ज्यादा जला था, लेकिन चेहरा और वर्दी काफी हद तक सुरक्षित थे। यह साफ था कि वह आखिरी सांस तक विमान और यात्रियों को बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे।” — रोमिन वोहरा (चश्मदीद)
यह गवाही साबित करती है कि कैप्टन ने हार नहीं मानी थी, बल्कि वे एक ऐसी तकनीकी खराबी से लड़ रहे थे जो उनके नियंत्रण से बाहर थी।
AAIB की रिपोर्ट और अनसुलझे सवाल
AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau) की शुरुआती रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई थी कि टेक-ऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे। कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता भी है कि “स्विच किसने बंद किए?”, जिस पर दूसरा पायलट इनकार करता है।
यहाँ कुछ गंभीर सवाल खड़े होते हैं:
- अगर पायलटों ने स्विच बंद नहीं किए, तो क्या बोइंग के सिस्टम में कोई ऐसी गंभीर खामी थी जिससे स्विच अपने आप बंद हो गए?
- क्या विदेशी मीडिया ने बोइंग की गिरती साख को बचाने और भारत की छवि खराब करने के लिए जानबूझकर कैप्टन सभरवाल को बलि का बकरा बनाया?
- बोइंग के विमानों के सुरक्षा रिकॉर्ड पहले भी विवादों में रहे हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने कंपनी की जिम्मेदारी पर चुप्पी क्यों साधे रखी?
निष्कर्ष: न्याय की प्रतीक्षा
जब भारतीय जांच एजेंसियों ने स्पष्ट कहा था कि जांच जारी है और किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, तब अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा ‘पायलट की गलती’ का नैरेटिव गढ़ना एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।
अब सवाल यह है कि क्या रोमिन वोहरा जैसे चश्मदीदों के बयान के बाद विदेशी मीडिया अपनी गलती सुधारेगा? क्या 260 पीड़ितों के परिवारों को यह पता चल पाएगा कि उस दिन आसमान में असल में हुआ क्या था? उम्मीद जताई जा रही है कि चश्मदीद के बयान के बाद जांच की दिशा और दशा में बदलाव आ सकते हैं। वैसे AAIB की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद जांच एजेंसी के तरफ़ यह भी कहा गया था कि इस जाँच को लेकर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
