पेपर लीक की इन तस्वीरों के पीछे छुपी है आधी सच्चाई, जानिए राज्यों की खामोशी पर बड़े सवाल
दिल्ली की सड़कों पर छात्रों का प्रदर्शन, जंतर-मंतर से लेकर कनॉट प्लेस तक युवाओं का हुजूम और सोशल मीडिया पर आक्रोश—ये तस्वीरें आज हर किसी के स्क्रीन पर हैं। देश का युवा गुस्से में है और उसकी वजह है NEET (नीट) परीक्षा का पेपर लीक होना। पेपर लीक माफियाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस देश में सिर्फ एक NEET का ही पेपर लीक हुआ है? क्या सिर्फ एक ही जगह युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है?
NEET: मेहनत पर माफियाओं का डाका
NEET यानी देश के भावी डॉक्टरों को चुनने वाली परीक्षा। इस परीक्षा के लिए एक छात्र अपने जीवन के सबसे कीमती साल एक छोटे से कमरे में बंद होकर गुजार देता है। माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई से कोचिंग की फीस भरते हैं। लेकिन जब परीक्षा का दिन आता है, तो पता चलता है कि पेपर पहले से ही वॉट्सऐप पर बिक रहा था।
जब पेपर लीक होता है, तो:
- सिर्फ परीक्षा रद्द नहीं होती, बल्कि छात्र का मनोबल टूटता है।
- परिवार का सिस्टम और व्यवस्था पर से भरोसा उठता है।
- दोबारा परीक्षा देने का मानसिक और आर्थिक दबाव छात्र को तोड़ देता है।
छात्रों की यह मांग पूरी तरह जायज है कि NTA से लेकर पेपर प्रिंट करने वाली एजेंसियों तक की जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यह सीधे तौर पर सिस्टम का फेल्योर (विफलता) है, जिसका कोई बचाव नहीं हो सकता।
क्या झारखंड, पंजाब और हिमाचल भारत का हिस्सा नहीं हैं?
NEET पर राष्ट्रव्यापी बहस जायज है, लेकिन क्या देश के अन्य राज्यों में युवाओं के साथ हो रहे खिलवाड़ पर बात नहीं होनी चाहिए?
- झारखंड: JPSC पेपर लीक के बाद राज्य भर में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग हो रही है।
- पंजाब: फार्मासिस्ट ऑफिसर भर्ती परीक्षा में हुई धांधली से हजारों योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है।
- हिमाचल प्रदेश: एक के बाद एक कई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक का तमाशा जारी है।
अगर NEET पेपर लीक एक राष्ट्रीय मुद्दा है और केंद्र सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए, तो क्या गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की कोई जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए? क्या उन राज्यों के युवाओं का भविष्य कम कीमती है?
राजनीति और मीडिया का ‘सिलेक्टिव’ रवैया
दुर्भाग्य से, इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक दलों और मीडिया का सिलेक्टिव रवैया देखने को मिल रहा है। जहां NEET पर जमकर सियासत हो रही है, वहीं अन्य राज्यों के पेपर लीक मामलों पर विपक्षी नेता और संबंधित राज्य सरकारें चुप्पी साधे बैठी हैं।
- केंद्र हो या राज्य, सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—गंदी राजनीति के इस खेल में पिसता सिर्फ आम छात्र है।
- छात्र किसी राजनीतिक दल का झंडा उठाकर परीक्षा केंद्र नहीं जाता। वह बिना किसी सिफारिश के, अपनी मेहनत के दम पर अपना और देश का भविष्य बनाना चाहता है।
- छात्र इस देश का भविष्य हैं। अगर उनके सपनों पर इसी तरह राजनीति होती रही, तो यह देश के लिए बेहद घातक साबित होगा।
जागरूक नागरिक बनिए, सवाल पूछिए
अगर हमें अपने बच्चों और देश के युवाओं का भविष्य बचाना है, तो एक जागरूक नागरिक के तौर पर हर सरकार से सवाल पूछना होगा:
- क्यों हर भर्ती परीक्षा में दलाल और भ्रष्टाचारी हावी हो जाते हैं?
- क्यों कड़ी कार्रवाई के बड़े-बड़े दावों के बाद भी पेपर लीक का सिलसिला नहीं थमता?
जब तक आम जनता और छात्र हर सरकार से समान रूप से जवाबदेही नहीं मांगेंगे, तब तक ये पेपर लीक होते रहेंगे, सपने बिकते रहेंगे और युवा सड़कों पर लाठियां खाता रहेगा। छात्रों के हक के लिए आवाज उठाना हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन हमें इस बात का भी विशेष ध्यान रखना होगा कि इन आक्रोशित छात्रों और विरोध प्रदर्शनों की आड़ में भारत की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली देशविरोधी ताकतें अपने मंसूबों में कामयाब न हो सकें।
