ISIS नेटवर्क पर ED की रेड, ट्रेन उड़ाने की साज़िश नाकाम: देशविरोधी ताकतों पर सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा प्रहार
आतंकी संगठन ISIS, भारत में फैला कथित भर्ती नेटवर्क, टेरर फंडिंग, और अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताबड़तोड़ कार्रवाई। देश भर में सुरक्षा एजेंसियाँ और पुलिस बल इस समय देशविरोधी ताकतों और आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक बड़ा महाअभियान चला रहे हैं।
कहीं फंडिंग के तार काटे जा रहे हैं, तो कहीं देश को दहलाने वाले आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया जा रहा है। आइए, देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई इन बड़ी कार्रवाइयों को विस्तार से समझते हैं:
बेंगलुरु: ISIS फंडिंग और सीरिया में भर्ती नेटवर्क पर ED की सर्जिकल स्ट्राइक
कर्नाटक के बेंगलुरु में ED ने ISIS फंडिंग और सीरिया स्थित आतंकी कैंपों में भर्ती से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
युवाओं का ब्रेनवॉश: जांच में खुलासा हुआ है कि भारत के विभिन्न हिस्सों से युवाओं को बहला-फुसलाकर सीरिया भेजा जा रहा था।
ट्रस्टों की आड़ में खेल: इस पूरी साज़िश में ‘इकरा वेलफेयर ट्रस्ट’ और ‘GFM ट्रस्ट’ के नाम सामने आए हैं।
फंडिंग का पैटर्न: ये ट्रस्ट भर्ती हुए युवाओं के परिवारों को आर्थिक मदद देते थे और सीरिया में ट्रेनिंग कैंप चलाने के लिए ISIS को फंड ट्रांसफर करते थे।
पंजाब (मोगा): यात्री ट्रेन उड़ाने की बड़ी साज़िश नाकाम, 17 गिरफ़्तार
पंजाब की मोगा पुलिस ने एक बड़ी आतंकी साज़िश का पर्दाफाश करते हुए 17 आरोपितों को धर दबोचा है।
हथियार और विस्फोटक बरामद: पुलिस ने आरोपितों के पास से एक IED, विस्फोटक सामग्री, एक इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर और 9mm ग्लॉक पिस्टल (मैगज़ीन के साथ) ज़ब्त की है।
विदेशी आकाओं का हाथ: शुरुआती जांच से साफ़ हुआ है कि यह पूरा मॉड्यूल विदेश में बैठे आकाओं के इशारों पर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था।
जम्मू-कश्मीर (किश्तवाड़): मौलवी की आड़ में छिपा जैश-लश्कर का ‘ग्राउंड हैंडलर’ गिरफ्तार
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ‘सैफुल्ला ग्रुप’ के मुख्य ग्राउंड हैंडलर मौलवी मोहम्मद रफीक नाइक को गिरफ्तार किया है।
मदरसे/मस्जिद की आड़: रफीक नाइक एक स्थानीय मस्जिद में मौलवी के रूप में काम कर रहा था।
2 साल तक पनाह: जांच में पाया गया कि इस मौलवी ने आतंकी कमांडर सैफुल्ला और उसके साथियों को छात्रू के जंगलों में दो साल तक पनाह, खाना और रसद मुहैया कराई।
नैरेटिव बनाम हक़ीक़त: एजेंसियों की साख बिगाड़ने की साज़िश?
इन तमाम मामलों को एक साथ समझने की ज़रूरत क्यों है?
आजकल सोशल मीडिया और दिल्ली के जंतर-मंतर से आ रही खबरों के ज़रिए एक खास नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि आम जनता के मन में देश की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति अविश्वास और ज़हर घोला जा सके।
