जंतर-मंतर पर प्रदर्शन या ‘हाइब्रिड वॉर’? विदेश से आ रहे पिज्जा-बर्गर और फंडिंग के दावों से मचा बवाल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इन दिनों विरोध-प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है। 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के बाद से इस आंदोलन को लेकर नए-नए दावे और विवाद सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ दावों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रदर्शन के तार देश के बाहर से जुड़े होने का आरोप लगाया जा रहा है।
विदेश से जुड़ाव और रणनीतिक एंट्री का आरोप
आंदोलन की पटकथा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दावों के अनुसार, बोस्टन (अमेरिका) से अभिजीत दिपके की जंतर-मंतर पर मौजूदगी और उसके बाद लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल के ऐलान ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। इस दौरान कई राजनीतिक चेहरों और बॉलीवुड से जुड़े एक्टिविस्टों की आवाजाही भी देखने को मिली।
बांग्लादेश, कतर और बहरीन से पिज्जा-बर्गर ऑर्डर?
25 दिनों से अधिक समय से चल रहे इस प्रदर्शन में खान-पान की व्यवस्था को लेकर जो दावे सामने आए हैं, उन्होंने सभी को हैरान कर दिया है। बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों के लिए विदेश से फास्ट फूड जैसे पिज्जा और बर्गर ऑनलाइन ऑर्डर किए जा रहे हैं। डिलेवरी बॉयज़ के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उनके पास बांग्लादेश, कतर और बहरीन जैसे देशों से फोन कॉल आते हैं। इन ऑर्डर का भुगतान एडवांस में ऑनलाइन कर दिया जाता है और खाना जंतर-मंतर पर डिलीवर करने का निर्देश दिया जाता है।
‘हाइब्रिड वॉर’ और सुरक्षा पर सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन दावों के बाद यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह सिर्फ छात्रों या स्थानीय मुद्दों को लेकर किया जा रहा एक जन-आंदोलन है, या फिर इसके पीछे किसी ‘हाइब्रिड वॉर’ (Hybrid Warfare) की रणनीति काम कर रही है? आलोचकों का तर्क है कि भारत-विरोधी रुख रखने वाले विदेशी नेटवर्क देश के भीतर अशांति फैलाने के उद्देश्य से ऐसे प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं। संसद मार्च से लेकर विदेशी फंडिंग और ऑनलाइन फूड डिलीवरी तक की कड़ियों को एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर आधिकारिक जांच एजेंसियों की ओर से कोई अंतिम बयान आना बाकी है, लेकिन जंतर-मंतर के इस घटनाक्रम ने देश की आंतरिक सुरक्षा और छात्र आंदोलनों की आड़ में राजनीति करने वालों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
