क्या सोनम वांगचुक वाकई महान वैज्ञानिक हैं? जानिए उनके काम को लेकर क्या हैं तथ्य और विवाद
फिल्म 3 इडियट्स के लोकप्रिय किरदार “फुंसुख वांगड़ू” की प्रेरणा माने जाने वाले सोनम वांगचुक को अक्सर एक महान वैज्ञानिक और नवाचारकर्ता के रूप में पेश किया जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से उनके काम को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। आखिर उनके योगदान को लेकर क्या तथ्य हैं और क्या सिर्फ दावे? आइए जानते हैं।
आइस स्तूप को लेकर सबसे ज्यादा बहस
सोनम वांगचुक का सबसे चर्चित प्रोजेक्ट आइस स्तूप (Ice Stupa) है। यह सर्दियों में पानी को शंकु के आकार की बर्फ संरचना के रूप में जमा करके गर्मियों में सिंचाई के लिए उपलब्ध कराने की तकनीक है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि कृत्रिम ग्लेशियर (Artificial Glacier) का विचार सबसे पहले 1980 के दशक में लद्दाख के इंजीनियर चेवांग नोरफेल ने विकसित किया था। वहीं समर्थकों का तर्क है कि वांगचुक ने उसी अवधारणा को नई इंजीनियरिंग तकनीक और अलग डिज़ाइन के साथ विकसित कर बड़े स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
इंटरनेट क्रांति का पूरा श्रेय देना सही है?
सोशल मीडिया पर कई बार दावा किया जाता है कि लद्दाख में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का श्रेय सोनम वांगचुक को जाता है। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, लद्दाख में वायरलेस इंटरनेट सेवाओं के विस्तार में निजी कंपनियों और दूरसंचार संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए इस उपलब्धि का पूरा श्रेय केवल एक व्यक्ति को देना उचित नहीं माना जाता।
सोलर मड हाउस कितना नया विचार?
सोनम वांगचुक ने लद्दाख में ऊर्जा दक्ष भवनों और सोलर हीटिंग वाले घरों को बढ़ावा दिया है। हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि मिट्टी से बने घर और Trombe Wall जैसी निष्क्रिय सौर ताप (Passive Solar Heating) तकनीक का उपयोग दुनिया के कई हिस्सों में दशकों से होता रहा है। वांगचुक का योगदान इन पारंपरिक तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आधुनिक रूप में लागू करने का माना जाता है, न कि इनके मूल आविष्कारक के रूप में।
क्या उनके नाम कोई पेटेंट है?
सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि सोनम वांगचुक के नाम कोई आधिकारिक पेटेंट नहीं है। सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनके व्यक्तिगत नाम पर बड़े अंतरराष्ट्रीय पेटेंट व्यापक रूप से दर्ज नहीं मिलते। हालांकि किसी नवाचार की उपयोगिता का मूल्यांकन केवल पेटेंट की संख्या से नहीं किया जाता। कई सामाजिक और शैक्षणिक नवाचार बिना पेटेंट के भी विकसित किए जाते हैं।
