पंजाब के सरकारी स्कूल में बिजली गुल! 42 हजार रुपये का बिल नहीं भर सकी सरकार?
“जिस पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ महीने पहले तक अरविंद केजरीवाल सुपर सीएम बनकर अपनी पीठ थपथपा रहे थे और मुख्यमंत्री भगवंत मान की तारीफ कर रहे थे, अब उसी पंजाब के सरकारी स्कूल को लेकर ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।”
भारत में भीषण गर्मी का असर हर कोई महसूस कर रहा है। ऐसे में ज़रा सोचिए कि अगर छोटे-छोटे बच्चों को घंटों तक बिना बिजली, बिना पंखे और बिना किसी राहत के क्लासरूम में बैठकर पढ़ाई करनी पड़े, तो उनकी हालत क्या होगी?
कुछ ऐसा ही मामला पंजाब के लुधियाना से सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लुधियाना के Government Primary School, Sati Sudha में कई दिनों तक बिजली नहीं रही। वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि बिजली बिल का भुगतान न होना बताया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 200 गज में बने इस सरकारी प्राथमिक विद्यालय में लगभग 200 बच्चे पढ़ते हैं। यहां नर्सरी से लेकर पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है। लेकिन बिजली न होने की वजह से बच्चों और शिक्षकों को भीषण गर्मी में पढ़ाई और पढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
यहीं से सवाल उठने लगे।
जिस शिक्षा मॉडल को लेकर आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार अपनी सरकार की उपलब्धि बताते रहे हैं, उसी राज्य के सरकारी स्कूल में बिजली का संकट आखिर क्यों खड़ा हो गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल का बिजली बिल करीब 42 हजार रुपये बकाया था। आरोप है कि इसी वजह से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
हालांकि, मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से सफाई भी दी गई। उन्होंने कहा कि स्कूल में स्मार्ट मीटर लगा हुआ है और संबंधित अधिकारियों को तुरंत मीटर रिचार्ज कराने के निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके।
लेकिन सवाल केवल 42 हजार रुपये का नहीं है।
सवाल यह है कि अगर सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को गर्मी के मौसम में बुनियादी सुविधा यानी बिजली भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही, तो शिक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों का क्या मतलब रह जाता है?
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।
अब देखना होगा कि यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित रहता है या पंजाब सरकार राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों में भी बिजली और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा करती है।
