जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर की तैयारी! क्या आज़म खान के ड्रीम प्रोजेक्ट का अंत करीब है?
“जिस यूनिवर्सिटी को आज़म खान ने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था… जिस यूनिवर्सिटी को समाजवादी पार्टी की सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाता था… अब उसी जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने की तैयारी हो गई है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि करोड़ों रुपये की इस यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को अवैध घोषित कर दिया गया?”
उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह शिक्षा नहीं, बल्कि अवैध निर्माण को लेकर हुई प्रशासनिक कार्रवाई है।
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित बताते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को 15 दिन का समय दिया है कि वह स्वयं इन निर्माणों को हटा दे। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो प्रशासन कार्रवाई करेगा।
इतना ही नहीं, प्रशासन ने यह भी कहा है कि यदि उसे खुद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी पड़ी, तो उसका पूरा खर्च भी संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा।
जांच में क्या सामने आया?
रामपुर विकास प्राधिकरण की जांच के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में केवल मेडिकल ब्लॉक और प्रशासनिक (एडमिन) ब्लॉक के लिए ही स्वीकृत नक्शा उपलब्ध पाया गया। बाकी अधिकांश भवनों के निर्माण के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। इसी आधार पर प्राधिकरण ने कार्रवाई का आदेश जारी किया है।
यहीं से मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता रहा है। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में इस विश्वविद्यालय को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता था। ऐसे में अब इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई केवल निर्माण नियमों और स्वीकृत नक्शे के आधार पर की जा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी भवन का निर्माण बिना वैधानिक अनुमति के हुआ है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसी बहस के बीच एक और सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या यह कार्रवाई किसी शिक्षण संस्थान के खिलाफ है या फिर अवैध निर्माण के खिलाफ?
सरकार के समर्थकों का कहना है कि पिछले वर्षों में देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में कई नए संस्थानों का विस्तार हुआ है और किसी भी निर्माण को कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। वहीं विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है…
क्या जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन इस आदेश को अदालत में चुनौती देगा? क्या 38 भवनों पर वास्तव में बुलडोजर चलेगा? और क्या यह मामला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति का नया बड़ा मुद्दा बनेगा?
फिलहाल इतना तय है कि जौहर यूनिवर्सिटी पर रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई ने एक बार फिर आज़म खान और समाजवादी पार्टी को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब आगे की दिशा अदालत और प्रशासनिक प्रक्रिया तय करेगी।
