तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: क्या राहुल गांधी की ‘विरासत’ और CM विजय के बीच बढ़ेगी तकरार?

0
ChatGPT Image Jul 17, 2026, 07_09_17 PM

तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों (Navodaya Vidyalayas) को खोलने को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। इस पूरे मामले ने अब राज्य में ‘राहुल गांधी बनाम मुख्यमंत्री विजय’ का राजनीतिक रंग ले लिया है, क्योंकि नवोदय विद्यालय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना थी, जिसे लागू करने में वर्तमान सरकार हिचकिचाती दिख रही है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? तीखे सवालों के घेरे में राज्य सरकार

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने का निर्देश दिया गया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में क्या हुआ, इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • समय की मांग: राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने मामले को टालने का अनुरोध करते हुए पीठ को एक पत्र सौंपा।
  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “आपके यहाँ नवोदय विद्यालय होने ही चाहिए।”
  • खर्च पर सवाल: जस्टिस नागरत्ना ने राज्य सरकार को याद दिलाया, “इसका सारा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। आपको सिर्फ जमीन उपलब्ध करानी है। जब बाकी सभी राज्यों में नवोदय विद्यालय हैं, तो आप तमिलनाडु के बच्चों को इससे क्यों वंचित रख रहे हैं?”
  • कोर्ट का आदेश: नवोदय विद्यालय समिति के वकील ने दलील दी कि कोर्ट ने पहले जमीन के लिए 6 हफ्ते का समय दिया था, लेकिन अब राज्य सरकार 12 हफ्ते और मांग रही है। इसके बाद कोर्ट ने निर्देश लेने के लिए सरकार को कुछ समय दे दिया।

40 साल पुराना विवाद: क्यों तमिलनाडु में नहीं है एक भी नवोदय विद्यालय?

नवोदय विद्यालय की शुरुआत 1986 की नई शिक्षा नीति के तहत तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्रों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना था। देश के लगभग हर राज्य में यह व्यवस्था लागू है, लेकिन तमिलनाडु अपवाद है।

तमिलनाडु में पिछले 40 सालों से ‘त्रि-भाषा नीति’ (Three-Language Formula) का विरोध होता रहा है। नवोदय विद्यालयों में हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा की त्रि-भाषा नीति चलती है, जबकि तमिलनाडु में द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसी क्षेत्रीय पार्टियां हमेशा ‘द्वि-भाषा नीति’ (तमिल और अंग्रेजी) की समर्थक रही हैं। इसी राजनीतिक गतिरोध के कारण आज तक वहां एक भी नवोदय विद्यालय नहीं खुल सका।

राजनीतिक मजबूरी या विरासत का बलिदान?

तमिलनाडु की सियासत में आए हालिया बदलावों के बाद यह मामला और पेचीदा हो गया है। राज्य में थलपति विजय की अगुवाई वाली TVK सरकार को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है और कांग्रेस इस सरकार का हिस्सा भी है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि विजय सरकार पुरानी पार्टियों (DMK-AIADMK) की लीक से हटकर हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने को हरी झंडी दे देगी। अगर ऐसा होता, तो यह कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए एक बड़ी जीत होती, क्योंकि तमिलनाडु में राजीव गांधी का सपना साकार हो जाता।

कांग्रेस की चुप्पी पर उठे सवाल

हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखकर लगता है कि विजय सरकार फिलहाल इस योजना को लागू करने के मूड में नहीं है और कोर्ट में इस फैसले को टालने की कोशिश कर रही है। इसके बावजूद, कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर पूरी तरह से खामोश है। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या यह कांग्रेस की ‘राजनीतिक मजबूरी’ है, जहां सत्ता में बने रहने के लिए राहुल गांधी अपने ही पिता की विरासत पर समझौता करने को मजबूर हैं? फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट से मिलने वाली अगली तारीख और राज्य सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading