कांग्रेस के वफादार ने खोल दिए सोनिया के राज, अब खत्म हो जाएगी कांग्रेस की राजनीति

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सुशील शिंदे और सोनिया गांधी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका वो बयान जिसमें उन्होंने 2013 में दिए गए अपने विवादित “भगवा आतंकवाद” वाले बयान का उल्लेख किया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है और भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

क्या था ‘भगवा आतंकवाद’ विवाद?

साल 2013 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कांग्रेस के एक अधिवेशन में कहा था कि कुछ आतंकी गतिविधियों की जांच के दौरान हिंदुत्व संगठनों के नाम सामने आए हैं। उस समय उनके बयान में “भगवा आतंकवाद” शब्द का इस्तेमाल चर्चा का विषय बन गया था।

भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उस बयान का कड़ा विरोध किया था और आरोप लगाया था कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू संगठनों को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश कर रही है।

उस समय शिंदे ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा था कि वह उन मामलों का उल्लेख कर रहे थे जो पहले से जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों में चर्चा का विषय रहे थे। लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं है. बल्कि कांग्रेस ने सनातन आस्था पर हमला किया था.

नया बयान क्यों बना चर्चा का विषय?

एक पॉडकास्ट के दौरान शिंदे की कुछ टिप्पणियां सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इसके बाद भाजपा समर्थकों और कई राजनीतिक टिप्पणीकारों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों तक एक राजनीतिक नैरेटिव के तहत “भगवा आतंकवाद” शब्द का इस्तेमाल किया। शिंदे ने कहा कि ‘भगवा आतंकवाद’ ग़लत टर्म था। 

कांग्रेस और ‘हिंदू आतंकवाद’ की बहस

‘भगवा आतंकवाद’ और ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसे शब्दों को लेकर कांग्रेस पहले भी विवादों में रही है।

पूर्व गृह मंत्री P. Chidambaram ने भी 2010 के आसपास कुछ आतंकी मामलों की जांच का उल्लेख करते हुए ऐसे संकेत दिए थे, जिन्हें लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

भाजपा का आरोप रहा है कि कांग्रेस ने कुछ मामलों में जांच पूरी होने से पहले ही वैचारिक निष्कर्ष निकालने की कोशिश की। 

मालेगांव विस्फोट मामला भी फिर चर्चा में

इस विवाद के साथ एक बार फिर 2008 Malegaon bombings का मामला भी चर्चा में आ गया है। Malegaon बम ब्लास्ट के वक़्त साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के जानबूझकर राजनैतिक कारणों की वजह से इस मामले में आरोपी बनाया गया। 

राजनीतिक असर क्या है?

विश्लेषकों का मानना है कि ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्द भारतीय राजनीति में आज भी अत्यंत संवेदनशील हैं। भाजपा लंबे समय से इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती रही है और इसे हिंदू समाज के अपमान से जोड़कर पेश करती है।

दूसरी ओर कांग्रेस यह तर्क देती रही है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और किसी भी मामले में जांच के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।

बहस अभी खत्म नहीं

सुशील शिंदे के पुराने बयान और हालिया टिप्पणियों ने एक बार फिर उस राजनीतिक बहस को जीवित कर दिया है, जो पिछले डेढ़ दशक से भारतीय राजनीति का हिस्सा रही है।

भाजपा इसे कांग्रेस की वैचारिक भूल बता रही है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे संदर्भ से हटाकर पेश किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि “भगवा आतंकवाद” शब्द एक बार फिर भारतीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।

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