बेंगलुरु में कार्यकर्ताओं पर भड़के कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, डीके शिवकुमार के नारों पर खोया आपा

0
ChatGPT Image Jun 22, 2026, 07_08_08 PM

Kharge flared up on Congress Workers: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो रहा है। बेंगलुरु में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान भाषण देते समय खरगे अचानक अपने ही कार्यकर्ताओं पर भड़क उठे। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगा रहे कार्यकर्ताओं को कांग्रेस अध्यक्ष ने मंच से ही जमकर फटकार लगाई और उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाया। इस घटना के बाद से विपक्ष और सोशल मीडिया पर कांग्रेस की ‘तानाशाही’ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा वाकया बेंगलुरु का है, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद के पदभार ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया था। कर्नाटक में डीके शिवकुमार के समर्थकों का उत्साह इन दिनों सातवें आसमान पर है। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही कुछ कार्यकर्ताओं ने ‘डीके-डीके’ के नारे लगाने शुरू किए, मंच पर मौजूद मल्लिकार्जुन खरगे का पारा चढ़ गया। कार्यकर्ताओं का यह उत्साह कांग्रेस अध्यक्ष को रास नहीं आया और उन्होंने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए सरेआम मंच से ही कार्यकर्ताओं की क्लास लगा दी।

‘चुप बैठिए, यहां किसी नेता की पूजा नहीं होती’

गुस्से में चिल्लाते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यकर्ताओं को दुत्कारते हुए कहा, “चुप बैठिए! यह मत समझिए कि पूरा देश आपके हाथ में आ गया है। यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि कांग्रेस का कार्यक्रम है। यहां किसी नेता की पूजा नहीं होती। हम यहां पार्टी को मजबूत करने के लिए इकट्ठा हुए हैं।”

खरगे का गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ, उन्होंने कार्यकर्ताओं को सख्त चेतावनी देते हुए आगे कहा, “इस पूरे कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग हो रही है। फुटेज देखने के बाद अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पार्टी में अनुशासन सबसे जरूरी है।”

खरगे के इस गुस्से के पीछे क्या है असली वजह?

आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के समर्थन में नारेबाजी होना बेहद सामान्य बात है। लेकिन डीके शिवकुमार के नाम पर खरगे के इस कदर भड़कने के पीछे राजनीतिक विशेषज्ञ दो मुख्य वजहें मान रहे हैं:

  1. गांधी परिवार को खुश रखने की मजबूरी: सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी कभी भी डीके शिवकुमार को कर्नाटक का मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते थे। उनकी पहली और आखिरी पसंद हमेशा सिद्धरमैय्या ही थे। डीके शिवकुमार के बगावती तेवरों के बाद ही उन्हें सत्ता में हिस्सेदारी मिली। खरगे बखूबी जानते हैं कि पार्टी में बने रहने के लिए गांधी परिवार की पसंद-नापसंद का ख्याल रखना जरूरी है। ऐसे में शिवकुमार के पक्ष में नारेबाजी देखकर खरगे को लगा कि इससे राहुल गांधी नाराज हो सकते हैं, और उन्होंने सारा गुस्सा कार्यकर्ताओं पर निकाल दिया।
  2. ‘पुत्र-मोह’ और राजनीतिक कसक: राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी गर्म है कि मल्लिकार्जुन खरगे अंदर ही अंदर अपने बेटे प्रियांक खरगे को कर्नाटक के शीर्ष पद पर देखना चाहते थे। लेकिन डीके शिवकुमार के कद के आगे उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। माना जा रहा है कि यही कसक और जलन डीके-डीके के नारे सुनते ही गुस्से के रूप में बाहर आ गई।

सोशल मीडिया पर हो रही फजीहत

मल्लिकार्जुन खरगे के इस व्यवहार के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी एक बार फिर विवादों में है। सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली की सियासत तक यह बहस छिड़ गई है कि जो कांग्रेस खुद को लोकतंत्र का मसीहा बताती है, उसके अध्यक्ष अपने ही कार्यकर्ताओं को सरेआम जलील कर रहे हैं। आलोचक अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि जब यही नारे राहुल गांधी के लिए लगते हैं, तब खरगे चुप क्यों रहते हैं? क्या तब वह व्यक्ति-पूजा नहीं होती?

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading