नेहरू के लिए 24 घंटे में बना था अंग्रेजी टॉयलेट? जौनपुर के ऐतिहासिक घर से जुड़ा दिलचस्प किस्सा
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो समय-समय पर चर्चा का विषय बनते रहे हैं। इन्हीं में से एक कहानी उत्तर प्रदेश के जौनपुर से जुड़ी है, जहां दावा किया जाता है कि नेहरू के दौरे से पहले उनके लिए महज 24 घंटे के भीतर अंग्रेजी शैली का शौचालय बनवाया गया था। यह किस्सा आज भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और उस दौर की मेहमाननवाजी तथा नेताओं के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है।
जौनपुर का ऐतिहासिक भवन, जहां ठहरे थे स्वतंत्रता आंदोलन के दिग्गज
जौनपुर के रासमंडल मोहल्ले में स्थित स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय रामेश्वर प्रसाद सिंह का आवास आज भी इतिहास की कई यादों को अपने भीतर समेटे हुए है। बताया जाता है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह घर क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की बैठकों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यहीं पर आज़ादी की लड़ाई को लेकर रणनीतियां बनाई जाती थीं और कई बड़े नेता यहां आते-जाते थे।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, पंडित जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1922 और 1937 में इस भवन में आए थे। उनके आगमन की खबर मिलते ही पूरे शहर में उत्साह का माहौल बन जाता था और लोग उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते थे।
नेहरू के आगमन से पहले शुरू हुई विशेष तैयारियां
परिवार की बहू डॉ. विमला सिंह के मुताबिक, नेहरू के जौनपुर दौरे से जुड़ा एक रोचक प्रसंग आज भी लोगों को सुनाया जाता है। उन्होंने बताया कि उस समय किसी बड़े राष्ट्रीय नेता का आगमन केवल स्वागत तक सीमित नहीं होता था, बल्कि उनकी सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाता था।
बताया जाता है कि उस दौर में अधिकांश घरों में भारतीय शैली के शौचालय होते थे, जबकि नेहरू अंग्रेजी शैली के शौचालय का उपयोग करते थे। जैसे ही उनके इस ऐतिहासिक भवन में ठहरने की सूचना मिली, स्थानीय लोगों और प्रशासन ने मिलकर विशेष व्यवस्था करने का निर्णय लिया।
महज एक दिन में बन गया अंग्रेजी शौचालय
परिवार के अनुसार, नेहरू के आगमन से पहले केवल 24 घंटे के भीतर अंग्रेजी शैली का शौचालय तैयार कर दिया गया था। उस समय यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया था, क्योंकि ऐसी सुविधा अधिकांश लोगों ने पहले कभी नहीं देखी थी।
स्थानीय लोगों के बीच यह घटना लंबे समय तक चर्चा में रही। आज भी जब इस ऐतिहासिक भवन की बात होती है, तो नेहरू और अंग्रेजी टॉयलेट से जुड़ा यह किस्सा जरूर सुनाया जाता है। हालांकि यह कहानी स्थानीय पारिवारिक स्मृतियों और मौखिक परंपराओं पर आधारित है।
लोगों से सीधे जुड़ने वाले नेता थे नेहरू
डॉ. विमला सिंह ने बताया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू केवल एक बड़े राजनीतिक नेता ही नहीं थे, बल्कि आम लोगों से सीधे संवाद करने वाले व्यक्तित्व भी थे। जौनपुर प्रवास के दौरान उन्होंने स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों, युवाओं और समाज के प्रमुख लोगों से मुलाकात की थी।
