NEET आंदोलन के नाम पर ‘विदेशी टूलकिट’ सक्रिय? जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन और संदिग्ध फंडिंग पर उठे गंभीर सवाल

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Cockroach Janata Party Protest: देश में पिछले कुछ समय से परीक्षाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर कई तरह के प्रदर्शन देखने को मिले हैं। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नामक एक समूह द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को लेकर अब गंभीर दावे किए जा रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि यह आंदोलन अब छात्रों का नहीं, बल्कि देश के खिलाफ एक गहरी और डरावनी साजिश का हिस्सा बनता जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों और सोशल मीडिया पर एक्टिव कुछ जागरूक नागरिकों का कहना है कि जिस तरह के हालात श्रीलंका, नेपाल या बांग्लादेश में बने थे, क्या भारत के कुछ नौजवानों को भी उसी रास्ते पर ले जाने की कोशिश की जा रही है?

NEET परीक्षा से शुरुआत, पर अब जंतर-मंतर पर एजेंडा क्या है?

इस तथाकथित आंदोलन की शुरुआत NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और छात्रों की मांगों को लेकर हुई थी। लेकिन अब जब परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम आगे बढ़ चुके हैं, तब भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन के उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं।

जंतर-मंतर के जमीनी फुटेज और वहां मौजूद भीड़ को देखकर कई सवाल खड़े होते हैं:

  • भटके हुए मुद्दे: प्रदर्शन में शामिल युवाओं के हाथों में अब NEET से ज्यादा राजनीतिक नारे दिखाई दे रहे हैं।
  • विपरीत विचारधाराओं का मेल: कोई माइक पकड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का विरोध कर रहा है, तो कोई उमर खालिद को अपना नेता बता रहा है। यहाँ तक कि इस छात्र आंदोलन में किसानों को शामिल करने की बात भी की जा रही है।
  • किराए के प्रदर्शनकारी? आरोप है कि वहां खड़े आधे से ज्यादा युवाओं को यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे किस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में इस आंदोलन को ‘किराए के आंदोलनजीवियों का जमावड़ा’ कहा जा रहा है।

प्रति हफ्ता 1 लाख रुपये की फंडिंग: उस्मान फैजान अली का वीडियो बेनकाब

इस पूरे आंदोलन को जिंदा रखने के पीछे सबसे बड़ा सवाल पैसे (Funding) का है। आखिर बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के कोई आंदोलन इतने दिनों तक दिल्ली की सड़कों पर कैसे टिका रह सकता है? इस पूरे तमाशे के मुख्य चेहरे अभिजीत दिपके को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो (एक्स लिंक के अनुसार) में उस्मान फैजान अली नाम का एक व्यक्ति अभिजीत दिपके से सीधे तौर पर बात करता हुआ दिखाई दे रहा है। वह दावा कर रहा है कि वह हर हफ्ते 1 लाख रुपये भेज रहा है ताकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी टिके रहें और जोमैटो-स्विगी से खाना मंगाकर अपना धरना जारी रखें।

सबसे बड़ा सवाल यह है:

उस्मान फैजान अली, जो खुद भारत में नहीं रहता और अमेरिका के वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर यह सब संचालित कर रहा है, उसका इस आंदोलन से क्या हित है? न तो वह खुद NEET का छात्र है और न ही उसका कोई संबंधी इस परीक्षा से जुड़ा है। फिर क्यों विदेशी जमीन से भारतीय युवाओं को कानून और पुलिस के खिलाफ भड़काने के लिए भारी-भरकम पैसा भेजा जा रहा है?

क्या यह भारत में ‘रेजीम चेंज’ का ग्लोबल खेल है?

जब किसी छात्र आंदोलन में विदेशों से इस तरह की अंधाधुंध और संदेहास्पद फंडिंग आने लगे, तो यह मामला केवल शिक्षा व्यवस्था या परीक्षा का नहीं रह जाता। यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) से जुड़ जाता है। ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि यह पूरी तरह से एक विदेशी टूलकिट (Foreign Toolkit) का हिस्सा है। इसके तहत विदेशी ताकतें भारत में अस्थिरता पैदा करने और ‘रेजीम चेंज’ (सरकार पलटने) का एक घिनौना ग्लोबल खेल खेल रही हैं। उनका मकसद भारत की Gen-Z (युवा पीढ़ी) को शिक्षा की मुख्यधारा से हटाकर सड़कों पर पत्थर और झंडे लेकर पुलिस से भिड़ंत के लिए उकसाना है।

जंतर मंतर से हमारी ग्राउंड रिपोर्ट देखिए:

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