तमिलनाडु: मुख्यमंत्री विजय का बड़ा एक्शन, स्टालिन सरकार का फैसला पलटकर रद्द किए मंदिरों के 46 प्रोजेक्ट्स
नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने साफ किया कि मंदिरों की संपत्ति और फंड का इस्तेमाल केवल धार्मिक और पवित्र कार्यों के लिए ही किया जाएगा।
तमिलनाडु की सियासत में सत्ता परिवर्तन के बाद नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (TVK) ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सत्ता संभालते ही सीएम विजय ने पूर्ववर्ती एम.के. स्टालिन (DMK) सरकार के उस फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है, जिसके तहत हिंदू मंदिरों के फंड का इस्तेमाल गैर-धार्मिक कार्यों के लिए करने की योजना बनाई गई थी। विजय सरकार के इस फैसले से जहां राज्य के हिंदू संगठनों में खुशी की लहर है, वहीं विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है।
क्या था स्टालिन सरकार का फैसला ?
पिछली DMK सरकार ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के तहत आने वाले मंदिरों की कमाई और फंड का इस्तेमाल करने के लिए 46 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी।
- फंड का आवंटन: इन प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 246 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि तय की गई थी।
- गैर-धार्मिक कार्य: इस पैसे का इस्तेमाल मैरिज हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और शिक्षण संस्थान जैसे गैर-धार्मिक निर्माण कार्यों के लिए किया जाना था।
मुख्यमंत्री विजय का नया आदेश:
नया कार्यभार संभालते ही सीएम विजय ने इस पुराने आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया। सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मंदिरों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन सभी 46 प्रोजेक्ट्स की मंजूरी तुरंत प्रभाव से रद्द की जाती है। अब मंदिरों की चल-अचल संपत्ति और उनकी कमाई की एक-एक पाई सिर्फ और सिर्फ पवित्र और धार्मिक कार्यों में ही लगाई जाएगी।
क्या इस फैसले के पीछे है ‘मोदी फैक्टर’?
चेन्नई से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में इस बड़े फैसले के पीछे एक बेहद दिलचस्प इनसाइड स्टोरी की चर्चा हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस रुख के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मार्गदर्शन’ हो सकता है।
इनसाइड स्टोरी: हाल ही में नीति आयोग की एक हाई-लेवल बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के सीएम विजय के बीच मुलाकात हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के दौरान अंदरखाने प्रधानमंत्री ने विजय को जनता के दिलों पर राज करने और सनातन संस्कृति के सम्मान की राजनीति करने का रास्ता दिखाया था, जिसका असर अब उनके फैसलों में दिख रहा है।
चुनाव नतीजों ने बदली तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा
तमिलनाडु में आए चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जनता ने सनातन विरोधी बयानों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
- DMK की भारी शिकस्त: पिछले कार्यकाल में उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को लेकर दिए गए विवादित बयानों का बड़ा नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा। DMK महज 59 सीटों पर सिमट कर रह गई।
- कांग्रेस को झटका: DMK का साथ देने वाली कांग्रेस पार्टी को भी करारी हार का सामना करना पड़ा और वह सिर्फ 5 सीटें ही जीत सकी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी भी विजय के इस फैसले से असहज हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि TVK का यह प्रो-हिंदू रुख तमिलनाडु में कांग्रेस और उसके सहयोगियों की जमीन को पूरी तरह से खत्म कर सकता है। बहरहाल, मुख्यमंत्री विजय ने इस फैसले से साफ संदेश दे दिया है कि उनकी सरकार राज्य की धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
