टैरिफ की वजह से खुद फंस गए ट्रंप, अब टैरिफ से वसूले अरबों डॉलर लौटाने की नौबत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति अब उनके लिए ही बड़ी परेशानी बनती नजर आ रही है। जिस टैरिफ को ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की आर्थिक ताकत बढ़ाने और दूसरे देशों पर दबाव बनाने के हथियार के रूप में पेश किया था, वही नीति अब कानूनी विवादों में घिर गई है। अमेरिकी अदालतों में चल रही सुनवाई के बीच ऐसी स्थिति बन गई है कि सरकार को अरबों डॉलर की राशि वापस करनी पड़ सकती है।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन समेत कई देशों से आयात होने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि इससे अमेरिकी उद्योगों को फायदा होगा और विदेशी देशों पर आर्थिक दबाव बनेगा।
हालांकि, बड़ी संख्या में अमेरिकी कंपनियों ने इस फैसले का विरोध किया। कंपनियों का कहना था कि अतिरिक्त टैरिफ की वजह से उनके कारोबार की लागत बढ़ गई और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद मामला अदालत पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यूयॉर्क की अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कुछ अतिरिक्त आयात शुल्कों को गैरकानूनी माना है। अदालत का मानना है कि इस तरह के कर लगाने के अधिकार को लेकर संवैधानिक सीमाओं का पालन नहीं किया गया।
इसी के बाद टैरिफ से वसूली गई रकम की वापसी (रिफंड) को लेकर प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हुआ।
अदालत ने सरकार से मांगा जवाब
न्यूयॉर्क स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत (Court of International Trade) में सुनवाई के दौरान जज रिचर्ड ईटन ने अमेरिकी सरकार और कस्टम विभाग से रिफंड प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी मांगी।
जज ने यह जानना चाहा कि रिफंड की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी की जा सकती है और किन-किन कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा।
कितना पैसा लौटाना पड़ सकता है?
अमेरिकी कस्टम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने अतिरिक्त टैरिफ के जरिए करीब 166 अरब डॉलर की वसूली की थी।
रिपोर्टों के अनुसार:
लगभग 90 अरब डॉलर के रिफंड दावों को स्वीकार किया जा चुका है।
करीब 23 अरब डॉलर की राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
यही वजह है कि यह मामला अब अमेरिका के लिए एक बड़े आर्थिक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
सबसे बड़ा विवाद क्या है?
विवाद इस बात को लेकर है कि रिफंड का लाभ किसे मिलेगा। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि केवल उन कंपनियों को रिफंड मिलना चाहिए जिन्होंने ट्रंप की टैरिफ नीति को अदालत में चुनौती दी थी। वहीं, कंपनियों के वकीलों का तर्क है कि यदि अदालत ने टैरिफ को अवैध माना है, तो सभी प्रभावित आयातकों को समान रूप से रिफंड मिलना चाहिए।
सरकार पर पड़ सकता है भारी बोझ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत सभी आयातकों के पक्ष में फैसला देती है, तो अमेरिकी सरकार को अरबों डॉलर की अतिरिक्त राशि लौटानी पड़ सकती है। इससे सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय दबाव पड़ने की आशंका है।
