मल्लिकार्जुन खड़गे की बढ़ीं मुश्किलें! चुनावी हलफनामे में 36 करोड़ की संपत्ति छिपाने का आरोप, दर्ज हुई शिकायत
बेंगलुरु/नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे एक बड़े विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे (Election Affidavit) में एक ट्रस्ट की करोड़ों रुपये की संपत्ति की जानकारी कथित रूप से छिपाने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता कल्लाहल्ली ने इस मामले को लेकर कर्नाटक विधानसभा सचिवालय का दरवाजा खटखटाया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप? सामाजिक कार्यकर्ता कल्लाहल्ली द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में दावा किया गया है कि कलबुर्गी स्थित ‘सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट’ की 31 मार्च 2023 तक की कुल संपत्ति (नेट वर्थ) लगभग 36.86 करोड़ रुपये थी। आरोप है कि मल्लिकार्जुन खड़गे इस ट्रस्ट के संस्थापक हैं, लेकिन उन्होंने राज्यसभा चुनाव लड़ते समय दाखिल किए गए अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म-26) में इस ट्रस्ट की संपत्तियों, वित्तीय हितों और इससे जुड़े विवरणों का उल्लेख नहीं किया।
शिकायतकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार के लिए अपनी संपत्ति और वित्तीय हितों का पूरा और सही ब्योरा देना अनिवार्य है। ऐसे में खड़गे पर कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को कथित रूप से छिपाने का आरोप लगाया गया है।
कानूनी समीक्षा और जांच की मांग कल्लाहल्ली ने कर्नाटक विधानसभा सचिवालय से इस पूरे मामले की कानूनी समीक्षा कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के ट्रस्टी विवरण, ऑडिट रिपोर्ट, आयकर दस्तावेज (ITR) और अन्य वित्तीय अभिलेखों की गहन जांच की जानी चाहिए, ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि चुनावी हलफनामे में सभी आवश्यक जानकारियां दी गई थीं या नहीं।
फिलहाल कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार इस गंभीर आरोप और शिकायत दर्ज होने के बाद अभी तक मल्लिकार्जुन खड़गे या कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह होगा कि विधानसभा सचिवालय इस शिकायत पर क्या प्रारंभिक जांच या कानूनी परीक्षण की प्रक्रिया शुरू करता है। लोकसभा चुनावों के बाद लगे इस आरोप ने कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक की सियासत को गरमा दिया है।
