क्या कांग्रेस में विलय होने जा रही है TMC? बगावत के सुरों के बीच सोनिया-राहुल के ‘महा-ऑफर’ की इनसाइड स्टोरी

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Congress-TMC Merger: राजनीति के गलियारों में एक पुरानी कहावत अक्सर दोहराई जाती है, संकट आते ही विरोधी सक्रिय हो जाते हैं। आज कुछ ऐसा ही मंजर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सियासी बगावत का शोर इतना तेज है कि ममता बनर्जी के पैरों के नीचे से जमीन खिसकती नजर आ रही है। इसी राजनीतिक अनिश्चितता के बीच, कांग्रेस आलाकमान ने TMC को लेकर अपनी रणनीतिक चालें चलना शुरू कर दिया है। दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में लगातार हो रही इमरजेंसी मीटिंग्स इस बात का गवाह हैं कि पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा खेल चल रहा है।

सूत्रों के हवाले से आ रही खबरें बेहद चौंकाने वाली हैं। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को कांग्रेस में अपनी पार्टी का विलय करने के लिए बड़े-बड़े राजनीतिक ऑफर दिए जा रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बंगाल की ‘अग्निकन्या’ आत्मसमर्पण के लिए तैयार हो जाएंगी? या अभी भी उनके तरकश में कोई तीर बाकी है? आइए समझने की कोशिश करते हैं इस पूरी इनसाइड स्टोरी को।

64 विधायकों के बागी होने का दावा!

पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने ममता बनर्जी को बैकफुट पर ला दिया है। खबरों की मानें तो ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में TMC के नाराज विधायकों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए अपना एक अलग गुट तैयार कर लिया है। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि दीदी से नाराज चल रहे इन विधायकों की संख्या 64 को पार कर चुकी है।

अगर इन दावों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो इस बड़ी टूट के बाद ममता बनर्जी के पाले में सिर्फ 16 विधायक ही बचते हैं। महज 16 विधायकों के भरोसे सरकार बचाना तो दूर, खुद का राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखना भी नामुमकिन सा प्रतीत होता है। यही वजह है कि कोलकाता की यह चिंगारी अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है।

करीब 20 लोकसभा सांसदों पर नजर

TMC के लिए मुश्किलें सिर्फ बंगाल विधानसभा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की संसद में भी दीदी को गहरे जख्म मिले हैं। अब तक TMC के 3 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे की खबर आ चुकी है। वहीं, लोकसभा के अंदर मौजूद पार्टी के 29 सांसदों में से लगभग 20 सांसदों के बागी रुख अपनाने की अटकलें तेज हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस कथित बगावती लिस्ट में वे नाम शामिल हैं जो कभी ममता बनर्जी के सबसे वफादार और करीबी सिपहसालार माने जाते थे। इनमें सायोनी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे कद्दावर चेहरों का नाम हवा में तैर रहा है। आज हालात ये हैं कि ममता बनर्जी के कोर ग्रुप में केवल उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी जैसे गिने-चुने चेहरे ही बचे दिख रहे हैं। अपनों के इस तरह किनारा करने के कारण ही आज ममता बनर्जी के सामने कांग्रेस के साथ सम्मानजनक समझौता करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बच रहा है।

सोनिया-राहुल का ‘महा-ऑफर’

राजनीति में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, यहाँ सिर्फ अवसर मायने रखते हैं। कांग्रेस पार्टी इस समय ममता बनर्जी की राजनीतिक लाचारी को पूरी तरह भुनाने की कोशिश में है। सूत्रों का दावा है कि पिछले दिनों सोनिया गांधी की ममता बनर्जी से और राहुल गांधी की अभिषेक बनर्जी के बीच बेहद अहम और गोपनीय मुलाकातें हुई हैं। इस मुलाकात के दौरान कांग्रेस आलाकमान ने बनर्जी परिवार के सामने एक ऐसा ‘पावर पैकेज’ रखा है जिसे ठुकराना आसान नहीं होगा:

  • ममता बनर्जी: कांग्रेस की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद और राज्यसभा सीट का आश्वासन।
  • अभिषेक बनर्जी: कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव पद।

देखा जाए तो इस उम्र में ममता बनर्जी के लिए राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा पद और राज्यसभा की सुरक्षित सीट से बेहतर ‘रिटायरमेंट प्लान’ और क्या हो सकता है? आखिर ‘Beggars are not choosers’ (मजबूरों के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते)। जब अपनी ही पार्टी के नेता लोकसभा सीटें छोड़ने को तैयार न हों, तो राष्ट्रीय पार्टी का यह ऑफर संजीवनी जैसा लगता है।

अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक भविष्य

अगर अभिषेक बनर्जी की बात करें, तो आलोचकों का मानना है कि ममता बनर्जी के आभामंडल के बिना जमीन पर उनका स्वतंत्र जनाधार अभी भी बेहद कमजोर है। बंगाल के स्थानीय प्रदर्शनों में उनके खिलाफ लगने वाले तीखे नारे और जनता का आक्रोश इस बात का प्रमाण है। ऐसे माहौल में, देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी में सीधे ‘महासचिव’ का पद मिलना अभिषेक के राजनीतिक कद से कहीं बड़ा अवसर है। यह उनके लिए किसी भी नजरिए से घाटे का सौदा नहीं कहा जा सकता। अब राजनीतिक विश्लेषकों के बीच सवाल यह नहीं है कि विलय होगा या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि यह कब होगा? यह महज कुछ दिनों का खेल बचा है कि कब ममता बनर्जी कांग्रेस में अपनी ‘घर वापसी’ का आधिकारिक ऐलान करती हैं।

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