TCS के बाद अब Wipro में हुआ जबरन धर्मांतरण का कांड, हिंदू महिला को कंपनी ने निकाला
प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर
महाराष्ट्र के पुणे से एक आईटी कंपनी से जुड़ा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर कार्यस्थलों पर धार्मिक स्वतंत्रता, महिला सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। आईटी कंपनी Wipro की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी पर जबरन धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।
मामले को लेकर पुणे के हिंजवड़ी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। साथ ही पीड़िता की ओर से कंपनी को एक कानूनी नोटिस भी भेजा गया है, जिसमें कथित मानसिक प्रताड़ना और नौकरी से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आई पीड़िता की आपबीती
हिंदू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़िता ने अपनी आपबीती साझा की। महिला का आरोप है कि कंपनी में कार्यरत एक सहकर्मी लगातार उस पर इस्लाम स्वीकार करने और एक मुस्लिम युवक के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव डालता था।
पीड़िता का दावा है कि जब उसने इन प्रयासों का विरोध किया, तब उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उसका आरोप है कि शिकायत के बावजूद कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय उस पर ही दबाव बनाया।
नौकरी छोड़ने की नौबत आने का आरोप
महिला ने आरोप लगाया है कि लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना के माहौल के कारण वर्ष 2025 में उसे नौकरी छोड़नी पड़ी। पीड़िता के वकील विवेक भोसले के अनुसार, Wipro को भेजे गए लीगल नोटिस में महिला को पुनः नौकरी पर रखने और कथित मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की गई है।
कंपनी की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
खबर लिखे जाने तक Wipro की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
जांच पूरी होने से पहले आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले के सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना बाकी है।
कार्यस्थल पर सुरक्षा और शिकायत निवारण पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद कार्यस्थलों पर महिला सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और शिकायत निवारण तंत्र को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कॉर्पोरेट संस्था के लिए कर्मचारियों की शिकायतों को निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से सुनना तथा आवश्यक कार्रवाई करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि किसी कर्मचारी को कार्यस्थल पर उत्पीड़न, धार्मिक दबाव या भेदभाव का सामना करना पड़ता है, तो कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वह शिकायत की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और पीड़ित पक्ष को आवश्यक सहयोग प्रदान करे।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है। ऐसे में आरोपों की सत्यता और घटनाक्रम की पूरी जानकारी जांच प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इस मामले ने एक बार फिर यह बहस शुरू कर दी है कि भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर में कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए शिकायत निवारण तंत्र कितना प्रभावी है।
