दिल्ली में NEET पर हाय-तौबा, पंजाब में भर्ती का बड़ा घोटाला: विपक्ष का दोहरा रवैया और चुप्पी का सच!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और युवाओं के भविष्य को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष पूरी ताकत से केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहा है कि उसकी शिक्षा नीति बिल्कुल विफल हो चुकी है। NEET पेपर लीक को लेकर हुआ प्रदर्शन हिंसक हो चुका है और इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। लेकिन इसी हंगामे के बीच पंजाब की भगवंत मान सरकार ने भर्ती परीक्षा के नाम पर युवाओं के साथ क्या किया, इस पर आपका ध्यान गया ही नहीं।
सबकी निगाहें जंतर-मंतर के ड्रामे पर लगी रहीं और उधर पंजाब में आम आदमी पार्टी के राज में युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हो गया।
पंजाब का हाई-टेक नकल रैकेट और दिल्ली का राजनीतिक ड्रामा
एक तरफ़ दिल्ली में पेपर लीक का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल से लेकर आतिशी तक, तमाम वरिष्ठ नेता NEET और बच्चों के भविष्य की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे। ये नेता प्रदर्शनों में शामिल हुए, केंद्र पर हमला बोला और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया गया। लेकिन दूसरी तरफ़ पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान एक बेहद कड़े और हाई-टेक नकल रैकेट का पर्दाफाश हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने इस मामले में पैंतीस लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें अट्ठाईस अभ्यर्थी और सात कथित मास्टरमाइंड शामिल हैं। जांच में ब्लूटूथ डिवाइस, वायरलेस ईयरपीस और पेन कैमरा जैसे अत्याधुनिक उपकरण बरामद हुए। प्रश्नपत्र की तस्वीरें सीधे परीक्षा केंद्र से बाहर भेजकर जवाब अंदर अभ्यर्थियों तक पहुँचाने का पूरा खेल रचा जा चुका था।
जिस परीक्षा को पास करके युवा अपने करियर की उम्मीद लगाए बैठे थे, उसमें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज़रिए इतने बड़े पैमाने पर धांधली हो गई। लेकिन इस पर कहीं कोई नेशनल डिबेट नहीं हो रही है।
मनीष सिसोदिया का दावा और ‘इकोसिस्टम’ का दोहरा चरित्र
आपको याद दिला दें कि मनीष सिसोदिया ने मीडिया के सामने बड़े दावे के साथ कहा था कि अगर पंजाब में ऐसा कुछ हुआ, तो सबसे पहले पंजाब के शिक्षा मंत्री को पद से हटाया जाएगा। विडंबना देखिए कि मंत्री जी खुद दिल्ली में हुए ‘संसद मार्च’ में शामिल होकर NEET पेपर लीक का रोना रो रहे थे, जबकि उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके ही राज्य में फार्मेसी भर्ती का इतना बड़ा रैकेट चल रहा है।
इस मुद्दे पर न तो सोशल मीडिया के तथाकथित एक्टिविस्ट कुछ बोलेंगे और न ही कोई यूट्यूबर वीडियो बनाएगा। वजह साफ़ है, पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। पूरा विपक्षी इकोसिस्टम इस पर चुप्पी साध लेगा क्योंकि सच बोलने से उनका राजनीतिक एजेंडा ध्वस्त हो जाएगा।
यह साफ दर्शाता है कि छात्रों के प्रदर्शन का किस तरह से राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। यह छात्र हित नहीं, बल्कि पूरी तरह से पॉलिटिकल मोबिलाइजेशन है।
पंजाब के मामले पर सवाल क्यों नहीं?
हमारा सीधा सवाल इन सभी प्रदर्शनकारियों से है कि अगर आप वाकई छात्रों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, तो पंजाब के मुद्दे पर आपका मुंह क्यों बंद है? क्या पंजाब के छात्रों का भविष्य, दिल्ली के छात्रों से अलग है?
जंतर-मंतर पर मीडिया से बातचीत के दौरान मनीष सिसोदिया के उसी पुराने बयान का हवाला देकर अब राजनीतिक विरोधी सवाल पूछ रहे हैं। हालांकि, पंजाब पुलिस का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है, आरोपियों से पूछताछ हो रही है और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी का मुद्दा हर राज्य में एक ही पैमाने पर नहीं उठाया जाना चाहिए? क्या राजनीतिक दल सिर्फ अपनी सुविधा के हिसाब से राज्यों को चुनकर बयानबाज़ी करेंगे?
फिलहाल, इतना तय है कि दिल्ली में जारी इस सियासी घमासान के बीच पंजाब का यह कथित नकल रैकेट भी अब बड़े राजनीतिक सवालों के घेरे में आ चुका है।
