ममता बनर्जी को अपनी ही पार्टी में झटका, रितब्रत बनर्जी के साथ गए 58 विधायक

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जो ममता बनर्जी कभी पूरे बंगाल की राजनीति को अपनी उंगलियों पर नचाने का दावा करती थीं, आज उनका और उनकी पार्टी का खुद का अस्तित्व ही नहीं बचा है। ऐसा समझ लीजिए कि राजनीति के मामले में ममता बनर्जी सड़क पर आ गई हैं। उनकी पार्टी से उन्हें उखाड़ फेंकने का काम रितब्रत बनर्जी ने किया है। चलिए आपको भी बताते हैं पूरी खबर के बारे में।

टीएमसी से निष्कासित रितब्रत बनर्जी, ममता बनर्जी के लिए मुश्किल बन रहे हैं। रितब्रत बनर्जी लगातार अपनी ताकत बढ़ने का दावा कर रहे थे। उनके गुट का कहना था कि अब उनके समर्थन में 60 विधायक हैं। और उनकी बात सच भी साबित हुई है। पश्चिम बंगाल के बड़े सियासी संकट के बीच विधानसभा स्पीकर रथीन बोस ने बहुत बड़ा फैसला लिया।

टीएमसी के 80 में से 58 बागी विधायकों ने बुधवार को ममता बनर्जी की जगह रितब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुन लिया। स्पीकर ने इस दावे को मंजूरी भी दे दी। यानी बागी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी को आधिकारिक तौर पर बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता मान लिया गया है। यह बागी खेमे के लिए एक बहुत बड़ी कानूनी तथा राजनीतिक जीत है। यानी इससे अब टीएमसी पार्टी में ममता बनर्जी खेमे का नियंत्रण पूरी तरह खत्म होता दिख रहा है।

रितब्रत बनर्जी ने इसके बाद बयान भी जारी किया और कहा कि, “ममता बनर्जी ही हमारी सर्वमान्य नेता हैं। हम सभी टीएमसी के ही सिपाही हैं। समाज में यह मजाक का विषय बन गया था कि टीएमसी को विपक्ष का नेता चुनना तक नहीं आता। यही वजह है कि हम पार्टी को बचाने के लिए खुद आगे आए हैं।”

बीजेपी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस खबर को लेकर ममता बनर्जी पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, “ममता बनर्जी ने सोचा था कि प्रधानमंत्री मोदी को गाली देकर वह प्रधानमंत्री बन सकती हैं। एक महीने पहले वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री थीं। चुनाव में पश्चिम बंगाल की जनता ने उन्हें नकार दिया। आज तो उनकी पार्टी के सदस्यों और विधायकों ने भी उन्हें नकार दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में उनकी पार्टी पर उनका नियंत्रण खत्म हो चुका है। और यह तो बस शुरुआत है। उन्हें अपने किए का हिसाब देना होगा।”

बता दें, बीजेपी ने यह दावा पहले ही कर दिया था कि टीएमसी में बड़ी टूट होगी। यह दावा भाजपा नेता और मंत्री तपस रॉय ने किया था। उनके एक दावे ने ममता की नींद उड़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तपस रॉय ने एक फेसबुक पोस्ट किया था। उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

उन्होंने दावा किया, “तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बड़ी टूट हो सकती है और स्थिति महाराष्ट्र जैसी बन सकती है। रितब्रत बनर्जी के संपर्क में टीएमसी के करीब 50 विधायक हैं।” बता दें, पोस्ट में उन्होंने टीएमसी के चर्चित नारे ‘खेला होबे’ का भी जिक्र किया और कहा कि, “अब वास्तविक राजनीतिक खेल देखने को मिल सकता है।”

उन्होंने कहा था, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी धीरे-धीरे विभाजन की ओर बढ़ रही है। यदि पार्टी में टूट होती है, तो पश्चिम बंगाल में भी वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में हुई राजनीतिक उथल-पुथल जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य से धीरे-धीरे गायब हो जाएगी।”

और अब ये बात सच होती दिख रही है।

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