कर्नाटक के एक न्यूज़पेपर ने डीके शिवकुमार को दर्शाया भगवान शिव, सोशल मीडिया मैच गया बवाल

0
डीके शिवकुमार

कर्नाटक में सत्ता का हस्तांतरण हो चुका है और डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। लेकिन शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों के भीतर एक ऐसा विवाद सामने आ गया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। दरअसल, कन्नड़ के प्रमुख समाचार पत्र विश्ववाणी ने अपने फ्रंट पेज पर एक स्केच प्रकाशित किया, जिसमें डी.के. शिवकुमार को भगवान शिव के रूप में दर्शाया गया। अखबार के इस चित्रण को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।

फ्रंट पेज पर भगवान शिव के रूप में दिखे डी.के. शिवकुमार

विश्ववाणी द्वारा प्रकाशित स्केच में डी.के. शिवकुमार को भगवान शिव के स्वरूप में दिखाया गया है। तस्वीर में उनके सिर पर जटाएँ दिखाई गई हैं, उन्होंने बाघ की खाल धारण की हुई है तथा उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू भी नजर आ रहे हैं।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब अखबार के एडिटर-इन-चीफ विश्वेश्वर भट ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अखबार के फ्रंट पेज की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “Vishwavani Page 1 Today”

इसके बाद यह तस्वीर तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने इसकी आलोचना शुरू कर दी।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

वायरल तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया, जबकि कई यूजर्स ने इसे राजनीतिक चापलूसी की पराकाष्ठा करार दिया।

एक यूजर ने इसे “सीधी-सीधी ईशनिंदा” बताया, जबकि दूसरे यूजर ने सवाल उठाया कि यदि किसी अन्य धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व को किसी राजनेता के रूप में प्रस्तुत किया जाता, तो देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता था।

क्या यह सिर्फ़ प्रशंसा है या राजनीतिक संदेश?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल उठने लगे हैं।

क्या विश्ववाणी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद डी.के. शिवकुमार के प्रति सम्मान और समर्थन दिखाने के उद्देश्य से यह चित्र प्रकाशित किया?

क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है?

कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति की दिशा में कोई संकेत देने की कोशिश कर रही है। हालांकि इन सवालों का कोई आधिकारिक उत्तर अभी तक सामने नहीं आया है।

कांग्रेस पर भी उठे सवाल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस विवाद को कांग्रेस से जोड़ने का प्रयास किया है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी का इतिहास हिंदू आस्था से जुड़े मुद्दों पर विवादों से जुड़ा रहा है, इसलिए इस चित्रण को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि इस चित्र के प्रकाशन में कांग्रेस की कोई भूमिका रही हो। इसलिए इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार करना उचित होगा।

पहले भी मिल चुके हैं ऐसे विशेषण

गौरतलब है कि डी.के. शिवकुमार को लेकर इस तरह की अतिशयोक्तिपूर्ण उपमाएँ पहले भी दी जा चुकी हैं। हाल ही में इंडिया टुडे की पत्रकार अक्षिता ने 31 मई को डी.के. शिवकुमार से मुलाकात के दौरान उन्हें “King of Karnataka” कहा था।

हालांकि “किंग ऑफ कर्नाटक” और भगवान शिव के स्वरूप में प्रस्तुत करने के बीच बड़ा अंतर है। यही वजह है कि विश्ववाणी का यह फ्रंट पेज अब व्यापक चर्चा और विवाद का विषय बन गया है।

Leave a Reply

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading