आईपीएल में बजा शिव तांडव स्त्रोतम तो लेफ्ट लिबरल को होने लगे पेट में दर्द

0
IPL

IPL SHIV TANDAV STROTAM IMAGE

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) का रोमांचक समापन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ऐतिहासिक और लगातार दूसरी खिताबी जीत के साथ हो गया। फाइनल मुकाबले में बेंगलुरु ने गुजरात टाइटंस को हराकर डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में अपना दबदबा कायम रखा। इस बड़ी जीत के बाद जहां एक तरफ आरसीबी के फैंस देश भर में जश्न में डूब गए, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर फाइनल की क्लोजिंग सेरेमनी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

विवाद की मुख्य वजह आईपीएल फाइनल की क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान हुआ सांस्कृतिक आयोजन बना। कार्यक्रम में प्रख्यात गायक कैलाश खेर द्वारा ‘शिव तांडव स्तोत्र’ का सस्वर गायन किया गया, जिसने पूरे स्टेडियम में एक आध्यात्मिक और ऊर्जावान माहौल बना दिया। इसके ठीक बाद मैदान के ऊपर एक भव्य ड्रोन लाइट शो (Drone Light Show) का आयोजन किया गया, जिसमें आसमान में चमकते हुए ‘त्रिशूल’ और ‘हर हर महादेव’ की आकृतियां उकेरी गईं।

इस प्रस्तुति के बाद सोशल मीडिया पर एक वर्ग (लेफ्ट लिबरल) ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई। उनका तर्क है कि क्रिकेट जैसे वैश्विक खेल मंच पर किसी विशिष्ट धार्मिक प्रतीक या स्तोत्र का इस तरह प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए।

इस वैचारिक बहस को हवा तब मिली जब कुछ खेल पत्रकारों और विचारकों ने ट्वीट कर लिखा कि खेलों को धर्म से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए (Keep religion out of sport)। हालांकि, इसके तुरंत बाद इंटरनेट पर यूजर्स ने इस सोच को ‘दोहरा मापदंड’ करार देते हुए पुराने संदर्भों को खंगालना शुरू कर दिया।

नेटीजंस ने कुछ साल पुराने स्क्रीनशॉट और तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उन्हीं विचारकों द्वारा खेल के मैदान पर अन्य धार्मिक गतिविधियों (जैसे मैदान में रोजा खोलना या नमाज पढ़ना) की सराहना की गई थी। इस विरोधाभास को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है कि जब एक समुदाय की धार्मिक या सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को ‘सांस्कृतिक स्वतंत्रता’ माना जाता है, तो सनातन संस्कृति के प्रतीकों के प्रदर्शन को ‘सांप्रदायिकता’ का चश्मा क्यों पहनाया जाता है?

खेल इतिहास के झरोखे से: क्या पहले नहीं रहा खेलों में राजनीतिक-धार्मिक दखल?

क्रिकेट में धर्म और राजनीति के घालमेल पर ज्ञान देने वालों को आलोचकों ने इतिहास का हवाला भी दिया है। तर्क के रूप में साल 1989 के भारत बनाम पाकिस्तान क्रिकेट मैच का संदर्भ दिया जा रहा है, जब पाकिस्तान के मैदान पर तत्कालीन भारतीय सलामी बल्लेबाज के. श्रीकांत पर दर्शक दीर्घा से कूदकर कुछ तत्वों ने हमला करने का प्रयास किया था। उस दौरान स्टेडियम में बाबरी मस्जिद और अन्य भू-राजनीतिक मुद्दों को लेकर पोस्टर भी लगाए गए थे।

तब communalism नहीं दिखा। तब यह नहीं दिखा कि sport में communalism हो रहा है। उस चीज को सेक्युलरिज्म के तौर पर पेश कर देंगे ये लोग। तो आप लोगों से एक ही अनुरोध है कि जब भी लैपटॉप खोलकर ट्विटर यानी एक्स पर ज्ञानबाजी करते हैं, तो थोड़ा फैक्ट्स भी देख लीजिए। सड़क पर अगर नमाज पढ़ना जायज है, तो IPL के सेरेमनी में शिव तांडव स्त्रोतम होना भी जायज है। 

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading