भगवान श्रीकृष्ण पर मौलाना जर्जिस अंसारी का घिनौना बयान: कान्हा को बताया ‘नमाज़ी मुस्लिम’, सोशल मीडिया पर फूटा सनातनी आक्रोश

0
ChatGPT Image Jul 17, 2026, 06_02_04 PM

क्या इस देश में हिंदुओं की आस्था का तमाशा बनाना अब एक आम बात हो चुकी है? क्या सहिष्णुता और सेक्युलरिज्म का बोझ सिर्फ सनातनियों के कंधों पर है? ये कुछ ऐसे तीखे सवाल हैं जो मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच एक बार फिर देश के करोड़ों लोगों के जेहन में कौंध रहे हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी मौलाना जर्जिस अंसारी का एक पुराना विवादित वीडियो फिर से तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उसने मर्यादा और इतिहास की सभी हदें पार कर दी हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद देश भर के सनातनियों में भारी गुस्सा है और इस नफरती मौलाना की तुरंत गिरफ्तारी की मांग उठ रही है।

मौलाना का बेतुका दावा

वायरल हो रहे इस वीडियो में मौलाना जर्जिस अंसारी कैमरे के सामने खुलेआम यह दावा करता दिख रहा है कि भगवान श्री कृष्ण धर्म से मुस्लिम थे। इतना ही नहीं, अपनी संकीर्ण सोच को सही ठहराने के लिए मौलाना ने यह तक कह दिया कि श्रीकृष्ण दिन में पांच बार नमाज़ पढ़ा करते थे।

इस जाहिलाना और मनगढ़ंत दावे को सच साबित करने के लिए मौलाना जर्जिस ने सनातनियों के सबसे पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक का सहारा लिया। उसने दावा किया कि गीता के श्लोक में भक्तों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरे शरीर से यानी ‘साष्टांग’ होकर पूजा करें, जिसे मौलाना ने अपने एजेंडे के तहत नमाज़ का तरीका बता दिया।

गीता के वास्तविक श्लोक का सच

मौलाना जर्जिस अंसारी ने अपने निजी और मजहबी एजेंडे को चमकाने के लिए गीता के जिस श्लोक को तोड़-मरोड़कर पेश किया, उसका सच बेहद पवित्र है। दरअसल, यह श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय का 10वां श्लोक है:

“योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः। एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः॥”

इस श्लोक का वास्तविक और पावन अर्थ है:

“एक योगी का परम धर्म है कि वह निरंतर अपने मन, अपने शरीर और अपनी आत्मा को उस परमपिता परमात्मा में लीन करे। वह एकांत स्थान पर रहे, अकेला रहे, और अपने मन तथा इंद्रियों को पूरी तरह वश में रखते हुए, सभी प्रकार की सांसारिक इच्छाओं और मोह-माया से मुक्त हो जाए।”

इस दिव्य श्लोक में दूर-दूर तक कहीं भी नमाज़, इस्लाम या किसी अन्य मजहबी इबादत का कोई ज़िक्र नहीं है। यह श्लोक पूरी तरह से अष्टांग योग, ध्यान और आत्म-साक्षात्कार के आध्यात्मिक मार्ग को दर्शाता है। लेकिन इस मौलाना ने अपनी कुंठित और जिहादी मानसिकता के कारण इसका अनर्थ कर दिया, जो सनातन धर्म के खिलाफ एक सोची-समझी साज़िश का हिस्सा जान पड़ता है।

जर्जिस अंसारी का पुराना इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब इस मौलाना ने अपने ज़हरीले बयानों से समाज में गंदगी फैलाई हो। मौलाना जर्जिस अंसारी का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी विवादों और कुंठा से भरा है। साल 2022 में इसी मौलाना ने एक सार्वजनिक मंच से महिलाओं को लेकर बेहद शर्मनाक बयान दिया था।

उस वक्त मौलाना ने कहा था कि—“एक मुस्लिम महिला को हर हाल में अपने पति की शारीरिक और यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिए तैयार रहना चाहिए, चाहे वह प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) में ही क्यों न हो।” प्रसव पीड़ा जैसी असहनीय तकलीफ में भी केवल हवस की वकालत करने वाला यह मौलाना न केवल महिला विरोधी है, बल्कि सभ्य समाज और संपूर्ण मानवता के चेहरे पर एक गहरा तमाचा है।

गिरफ्तारी की उठी मांग

मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के इस संवेदनशील दौर में मौलाना के इस पुराने वीडियो को दोबारा वायरल किया जाना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की एक गहरी साज़िश माना जा रहा है। वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आक्रोश की लहर है। लोग गुस्से में पूछ रहे हैं क्या हिंदुओं की भावनाएं इतनी सस्ती हैं कि कोई भी ऐरा-गैरा उठकर उनका मज़ाक उड़ा दे? सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर यही टिप्पणी किसी हिंदू ने दूसरे मज़हब पर की होती, तो क्या अब तक उसका हश्र “सर तन से जुदा” जैसा न हो चुका होता? देश के करोड़ों सनातनी अब सरकार और पुलिस प्रशासन से इस नफरती मौलाना पर राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की धाराओं के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई और उसकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading