महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ (BPO) से जुड़े बहुचर्चित और संवेदनशील मामले में जांच एजेंसी को एक बड़ी कामयाबी मिली है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब स्थानीय अदालत में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। करीब 1500 पन्नों की इस चार्जशीट के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, देवलाली कैंप थाने में दर्ज थी FIR
SIT द्वारा दाखिल यह चार्जशीट देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज पहली प्राथमिकी (FIR) के आधार पर तैयार की गई है। इस पहली चार्जशीट में मुख्य रूप से चार लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनके नाम इस प्रकार हैं:
दानिश एजाज शेख
तौसीफ बिलाल अत्तर
निदा एजाज खान (मुख्य महिला आरोपी)
मतीन मजीद पटेल (AIMIM कॉर्पोरेटर)
यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब बीपीओ में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न और उनके शोषण के गंभीर आरोप लगे थे। घटना के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि निदा खान काफी समय तक फरार रहने के बाद पुलिस की गिरफ्त में आई थी।
पूर्व सांसद इम्तियाज जलील का नाम आया सामने, कॉर्पोरेटर के बयान से खुला राज
इस 1500 पन्नों की चार्जशीट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील को लेकर हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब मुख्य आरोपी निदा खान फरार चल रही थी, तब पुलिस उसे संरक्षण देने के आरोप में AIMIM कॉर्पोरेटर मतीन पटेल को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी। पूछताछ के दौरान मतीन पटेल ने कथित तौर पर पुलिस के सामने बार-बार बयान दिया कि निदा खान और उसके परिवार की मदद के संदर्भ में “इम्तियाज जलील साहब से पूछना पड़ेगा।” पुलिस जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी महिला और उसके परिवार को कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई से बचाने के प्रयास किए जा रहे थे।
“जांच के लिए तैयार हूँ” – इम्तियाज जलील का पक्ष
इस मामले को लेकर जब मुख्यधारा के अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने पूर्व सांसद इम्तियाज जलील से संपर्क साधने की कोशिश की, तो उन्होंने हज यात्रा पर होने के कारण फोन के जरिए अपना पक्ष रखा।
जलील ने अपने बयान में कहा:
“मुझे चार्जशीट में अपना नाम शामिल किए जाने के संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, मैं किसी भी तरह की निष्पक्ष जांच का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। मैंने पहले भी सार्वजनिक मंचों पर यह स्वीकार किया था कि मैं उस लड़की (निदा) के परिवार से मिला था, और जो मुझे न्यायसंगत लगता है, मैं उसके लिए अपनी बात रखता रहूँगा।”
सोशल मीडिया पर बहस और राजनीतिक सवाल
चार्जशीट में हुए इन नए खुलासों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी संगठन अब AIMIM के शीर्ष नेतृत्व और असदुद्दीन ओवैसी से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उनकी पार्टी के पूर्व सांसद द्वारा इस संवेदनशील मामले के आरोपियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुंचाई जा रही थी?
साथ ही, मामले के तार कुछ अन्य संदिग्ध तत्वों से जुड़े होने की आशंकाओं के चलते पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की जा रही है। जांचकर्ताओं का कहना है कि यह पहली चार्जशीट है और आने वाले दिनों में पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) के जरिए कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।