बिहार में ‘खेला’: ओवैसी की AIMIM ने राज्यसभा चुनाव के बदले तेजस्वी से मांग ली MLC सीट, फंसा पेंच!
पटना: बिहार की सियासत में आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सरगर्मी चरम पर है। इस बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सामने एक ऐसी शर्त रख दी है, जिसने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। AIMIM ने साफ कहा है कि अगर आरजेडी को राज्यसभा चुनाव में उनका समर्थन चाहिए, तो बदले में उन्हें बिहार विधान परिषद (MLC) की एक सीट देनी होगी।
बिहार विधानसभा में आंकड़ों के खेल को देखते हुए AIMIM का यह दांव आरजेडी के लिए ‘निगलें तो तीखा, उगलें तो फीका’ जैसी स्थिति पैदा कर रहा है।
क्या है AIMIM का पूरा प्लान और क्यों फंसा पेंच?
बिहार विधानसभा में AIMIM के पास फिलहाल इकलौते विधायक और प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान हैं। भले ही संख्या बल एक हो, लेकिन राज्यसभा की कांटे की टक्कर में एक-एक वोट की कीमत अमूल्य हो जाती है। अख्तरुल इमान ने पटना में मीडिया से बात करते हुए साफ संकेत दे दिए हैं कि राजनीति में कुछ भी ‘मुफ्त’ नहीं होता।
अख्तरुल इमान का रुख: “हम धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत करना चाहते हैं, लेकिन हमारे वजूद और हक को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर आरजेडी हमारे सहयोग की उम्मीद करती है, तो उन्हें बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए आगामी एमएलसी चुनाव में हमारे लिए एक सीट छोड़नी होगी।”
आरजेडी के सामने खड़ी हुईं ये 3 बड़ी चुनौतियां:
- सीमांचल में हिस्सेदारी की मांग: AIMIM का मुख्य आधार सीमांचल का इलाका है। एमएलसी सीट मांगकर ओवैसी की पार्टी इस इलाके में मुस्लिम नेतृत्व को और मजबूत करना चाहती है, जो सीधे तौर पर आरजेडी के ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण को चुनौती देता है।
- गठबंधन के साथियों का दबाव: आरजेडी के साथ महागठबंधन में कांग्रेस और वामपंथी दल (Left Parties) भी शामिल हैं। अगर तेजस्वी यादव AIMIM की मांग मानते हैं, तो गठबंधन के बाकी दलों में भी सीटों को लेकर असंतोष भड़क सकता है।
- अतीत की तल्खी: अतीत में आरजेडी ने AIMIM के 4 विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था। माना जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी अब इस मौके का इस्तेमाल पुराना हिसाब चुकता करने और आरजेडी को बैकफुट पर लाने के लिए कर रही है।
तेजस्वी यादव के लिए क्यों जरूरी है एक-एक वोट?
2026 के इस राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) और विपक्ष (महागठबंधन) के बीच एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला है। मामूली अंतर से भी बाजी पलट सकती है। ऐसे में तेजस्वी यादव किसी भी कीमत पर एक भी वोट गंवाना नहीं चाहते। लेकिन अगर वो AIMIM को एमएलसी सीट देते हैं, तो इससे राजनीतिक गलियारों में यह संदेश जाएगा कि आरजेडी ओवैसी के दबाव के आगे झुक गई है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव इस सियासी चक्रव्यूह से निकलने के लिए अख्तरुल इमान से क्या डील करते हैं या फिर कोई नया समीकरण बिठाते हैं।
