अभिषेक बनर्जी को जैसे ही मार पड़ी कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने लौटे सारे लूटे पैसे

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Cut Money

वायरल तस्वीर

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक फिजां में आए बड़े बदलावों के बीच जमीनी स्तर पर इसका सीधा असर दिखने लगा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब भ्रष्टाचार और अवैध वसूली (Cut Money) के खिलाफ जनता का आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता जनता से ली गई कथित ‘कट-मनी’ (रिश्वत) की रकम वापस करते नजर आ रहे हैं।

जलपाईगुड़ी के पंचगढ़ में सामूहिक चौपाल लगाकर लौटाए पैसे

यह पूरा मामला रविवार (31 मई 2026) का बताया जा रहा है, जो जलपाईगुड़ी जिले की पंचगढ़ ग्राम पंचायत के अंतर्गत फकीर कुठी क्षेत्र में घटा। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को ग्रामीण जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा था। इस जन-आक्रोश से बचने के लिए नेताओं ने सामूहिक चौपाल बुलाई और खुले मैदान में लोगों के पैसे वापस किए। कुछ मामलों में तो नेता खुद पीड़ित परिवारों के घरों तक पैसे पहुंचाने पहुंचे।

जमीन और सरकारी योजनाओं के नाम पर वसूली का आरोप

स्थानीय बीजेपी नेता सुरेंद्र बर्मन के अनुसार, उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक एक पंचायत सदस्य ने अन्य टीएमसी नेताओं के साथ मिलकर इलाके के ग्रामीणों से लगभग ₹80 लाख की भारी-भरकम राशि वसूली थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह राशि किसी से जमीन के नाम पर, तो किसी से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बहाने ‘कट-मनी’ के रूप में ली गई थी। पैसे लेने के बावजूद ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिला, जिससे जनता में लंबे समय से असंतोष था। अब पैसे वापस मिलने के बाद स्थानीय परिवारों ने राहत की सांस ली है।

प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक बदलाव

जानकारों का मानना है कि राज्य की नई भाजपा सरकार द्वारा अवैध गतिविधियों, टोल प्लाजा पर अवैध वसूली और टैक्स विसंगतियों पर की जा रही सख्त कार्रवाई के कारण भ्रष्टाचार में लिप्त तत्वों में डर का माहौल है। हाल ही में अभिषेक बनर्जी के काफिले पर हुए पथराव और जन-आक्रोश की घटनाओं ने भी स्थानीय नेताओं को बैकफुट पर ला दिया है।

कभी सिंगापुर बनाना चाहता था कोलकाता

कभी भुखमरी के दौर से गुजर रहा सिंगापुर, कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) जैसा विकसित बनने का सपना देखता था। आज समय बदल चुका है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासनिक सुधारों और जीरो टॉलरेंस नीति से बंगाल एक बार फिर विकास की सही दिशा और दशा की ओर अग्रसर होगा।

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