नेपाल के पीएम बालेन शाह के बयान से मचा भूचाल, भारत के खिलाफ ब्रिटेन से मांगी मदद, मिला करारा जवाब

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Nepal PM Balen Shah Claim: नेपाल और भारत के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। इस बार विवाद की वजह नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह का एक ऐसा बयान है, जिसने न सिर्फ नेपाल के भीतर उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा है।

संसद में दिया बयान, खुद घिरे बालेन शाह

नेपाल की संसद में कालापानी और लिपुलेख विवाद पर बोलते हुए पीएम बालेन शाह ने एक हैरान करने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है। प्रधानमंत्री के मुंह से यह बात सुनते ही नेपाल की संसद और राजनीति में हड़कंप मच गया। विपक्ष और नेपाल के सीमा विशेषज्ञ इस बयान पर बुरी तरह भड़क गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को नेपाल के हितों के खिलाफ माना जा रहा है और कुछ दिग्गज नेताओं ने तो पीएम बालेन शाह से तुरंत इस्तीफे तक की मांग कर दी है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन से मांगी मदद

इस मामले को घरेलू स्तर से उठाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने के लिए बालेन शाह ने एक और बड़ा कदम उठाया। उन्होंने इस विवाद में सीधे ब्रिटेन से हस्तक्षेप की गुहार लगा दी। बालेन शाह के सलाहकार ने ब्रिटिश राजदूत से मुलाकात कर 1816 की ऐतिहासिक ‘सुगौली संधि’ (Sugauli Treaty) के समय के मूल नक्शे मांगे, ताकि वे अपने दावों को साबित कर सकें।

हालांकि, भारत के कड़े रुख और दोनों देशों के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए ब्रिटेन ने नेपाल को दोटूक जवाब दे दिया है। ब्रिटिश प्रशासन ने साफ कर दिया कि यह भारत और नेपाल का आपसी और द्विपक्षीय मामला है, और वे इसमें किसी भी तरह का दखल नहीं देंगे।

क्या है जमीनी हकीकत? ‘क्रॉस-होल्डिंग’ का सच

जानकारों और जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक, सच्चाई पीएम बालेन शाह के दावों से बिल्कुल अलग है। सीमा पर किसी भी देश की सरकार का अवैध कब्जा नहीं है। असल में, भारत और नेपाल की सीमाएं खुली होने के कारण दोनों तरफ के किसान एक-दूसरे की जमीन पर जाकर खेती करते हैं। इसे तकनीकी भाषा में ‘क्रॉस-होल्डिंग’ कहा जाता है। यह एक पारंपरिक व्यवस्था है, न कि कोई सरकारी या सैन्य कब्जा। ऐसे में बिना पूरी तैयारी और तथ्यों के ऐसा बयान देकर तथा ब्रिटेन के सामने हाथ फैलाकर पीएम बालेन शाह ने खुद को चौतरफा मुश्किलों में डाल लिया है। नेपाल के भीतर अब उनकी इस कूटनीतिक विफलता पर तीखे सवाल उठ रहे हैं।

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