नेपाल का नया ऑनलाइन कस्टम सिस्टम फेल? बॉर्डर पर रेंग रहीं भारतीय गाड़ियां, दलालों की चांदी
काठमांडू/रक्सौल: नेपाल सरकार द्वारा भारत से आने वाले वाहनों के लिए शुरू किया गया नया ऑनलाइन कस्टम सिस्टम ‘टेम्परेरी इम्पोर्ट ऑफ व्हीकल (TIV)’ भारतीय पर्यटकों और ड्राइवरों के लिए जी का जंजाल बन गया है। जिस ‘भंसार टैक्स’ (कस्टम ड्यूटी) की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम लाया गया था, वह अब बेहद जटिल रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के कारण बैकफायर कर गया है। भारत-नेपाल सीमा पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हैं और इस अव्यवस्था का फायदा उठाकर दलाल चांदी काट रहे हैं।
क्या है नया TIV सिस्टम और क्यों हुआ फेल?
नेपाल सरकार ने सीमा पर भीड़ कम करने और पारदर्शिता लाने के लिए भारतीय कारों, बाइकों और कमर्शियल ट्रकों के रजिस्ट्रेशन को ऑनलाइन किया था। लेकिन ग्राउंड जीरो पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
- जटिल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया: ऑनलाइन फॉर्म इतना पेंचीदा है कि आम भारतीय पर्यटकों और ट्रक ड्राइवरों के लिए इसे खुद भरना नामुमकिन साबित हो रहा है।
- सर्वर डाउन की समस्या: नेपाल भंसार विभाग की वेबसाइट का सर्वर लगातार लोड नहीं सह पा रहा है, जिससे एक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन होने में घंटों का वक्त लग रहा है।
- बॉर्डर पर भारी जाम: रक्सौल-बीरगंज, सोनौली और रुपईडीहा जैसे मुख्य बॉर्डर पॉइंट्स पर भारतीय वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं।
दलालों का बढ़ा आतंक, ₹100 के काम के लिए ₹1000 तक वसूली
ऑनलाइन सिस्टम का सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि बॉर्डर पर दलालों (एजेंट्स) का नया रैकेट खड़ा हो गया है।
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार: “जो ड्राइवर या पर्यटक ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं, मजबूरी में उन्हें बॉर्डर पर सक्रिय दलालों की मदद लेनी पड़ रही है। ये दलाल फॉर्म भरने और भंसार टैक्स जमा करवाने के नाम पर भारतीय नागरिकों से ₹500 से लेकर ₹1000 तक की अवैध वसूली कर रहे हैं।”
टैक्स की रकम ऑनलाइन कटने के बावजूद एंट्री पास (भंसार पर्ची) के लिए भारतीय चालकों को घंटों तक नेपाल कस्टम ऑफिस के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
पर्यटन और व्यापार पर सीधा असर
नेपाल की बालेन सरकार द्वारा हाल ही में भारतीय सामानों पर ₹100 (नेपाली ₹160) से ऊपर की खरीदारी पर कस्टम ड्यूटी लगाने के बाद से वैसे ही सीमावर्ती बाजारों में तनाव था। अब इस नए वाहन नियम ने रही-सही कसर पूरी कर दी है।
गर्मी की छुट्टियों में नेपाल (काठमांडू, पोखरा) घूमने जा रहे भारतीय पर्यटक इस भारी अव्यवस्था के कारण बॉर्डर से ही वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं। यदि नेपाल सरकार ने इस तकनीकी खराबी और जटिल प्रक्रिया को जल्द दुरुस्त नहीं किया, तो इसका सीधा असर नेपाल के पर्यटन और भारत से होने वाले व्यापार पर पड़ेगा।
