मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: ईरान ने कुवैत में अमेरिकी बेस पर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, अरबों के ‘रीपर ड्रोन’ मलबे में तब्दील
West Asia Conflict: मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव में बदल चुकी है। बंदर अब्बास पर हुए हमले की जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने एक बेहद आक्रामक और बड़ा कदम उठाया है। ईरान ने सीधे कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते हुए एक घातक बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी है। इस अचानक हुए हमले ने न केवल मिडिल ईस्ट, बल्कि पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को सकते में डाल दिया है।
अली अल सलेम एयर बेस पर हमला
सैन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सेना के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘अली अल सलेम एयर बेस’ (Ali Al Salem Air Base) को निशाना बनाकर यह मिसाइल हमला किया। जैसे ही ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, कुवैत के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने तत्परता दिखाते हुए मिसाइल को हवा में ही इंटरसेप्ट (रोक) कर दिया।
हालांकि, खतरा यहीं नहीं टला। मिसाइल भले ही हवा में नष्ट हो गई, लेकिन उसका भारी-भरकम और घातक मलबा सीधे अमेरिकी सैन्य बेस के अंदर जा गिरा, जिससे वहां भीषण तबाही मच गई।
‘किलर ड्रोन्स’ का भारी नुकसान
इस मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से अमेरिकी सेना को जान-माल का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। बेस के अंदर मौजूद कई अमेरिकी सैनिक और सुरक्षा कॉन्ट्रैक्टर्स गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन अमेरिका के लिए सबसे बड़ा झटका उसके तकनीकी और सामरिक मोर्चे पर लगा है।
- इस मलबे की सीधी चपेट में आने से अमेरिका के दो सबसे खतरनाक और आधुनिक MQ-9 Reaper ड्रोन्स पूरी तरह से नष्ट होकर मलबे में तब्दील हो गए।
- आपको बता दें कि महज एक रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर (यानी करीब 250 करोड़ रुपये) होती है।
- इस लिहाज से अमेरिका को इस हमले में सीधे तौर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय और सैन्य नुकसान हुआ है। MQ-9 रीपर ड्रोन को अमेरिका का ‘किलर ड्रोन’ कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल बेहद संवेदनशील और सटीक खुफिया मिशनों के लिए किया जाता है।
क्या शुरू होगा तीसरा विश्व युद्ध?
ईरान के इस सीधे और दुस्साहसिक हमले के बाद दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से चल रहा बेहद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) अब पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है। बंदर अब्बास पर हुए पिछले हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने जिस तरह सीधे अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया है, उससे साफ है कि अब दोनों देश आर-पार की जंग के मूड में हैं।
मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात इस वक्त एक लाइव टाइम बम की तरह बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का मानना है कि दोनों महाशक्तियों के बीच यह टकराव अगर तुरंत नहीं रोका गया, तो यह छोटी सी चिंगारी बहुत जल्द तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की वजह बन सकती है। पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिकी राष्ट्रपति और पेंटागन पर टिकी हैं कि वे अपने सैनिकों और अरबों के ड्रोन्स के नुकसान का बदला लेने के लिए ईरान पर क्या और कितना बड़ा जवाबी हमला करते हैं।
