क्या भारत-कनाडा संबंधों के बीच ‘खालिस्तानी चरमपंथ’ एक स्थायी अवरोध बन गया है?
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कनाडा के लोकतांत्रिक ढांचे और मानवाधिकारों के दावों पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। 26 मई 2026 को ओंटारियो के ब्रैम्पटन में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के काफिले पर हुआ हमला यह दर्शाता है कि कनाडा की धरती अब भी भारत विरोधी गतिविधियों का सुरक्षित केंद्र बनी हुई है।
घटनाक्रम: वियना कन्वेंशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी
सितंबर 2025 में कार्यभार संभालने वाले उच्चायुक्त दिनेश पटनायक जब ब्रैम्पटन के पियर्सन कन्वेंशन सेंटर पहुँचे, तब स्थिति तनावपूर्ण हो गई। खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों ने न केवल उनके काफिले का रास्ता अवरुद्ध किया, बल्कि सार्वजनिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कनाडाई पुलिस घटनास्थल पर मूकदर्शक बनकर रही।
कूटनीतिक विरोधाभास: उम्मीदें बनाम हकीकत
यह घटना एक ऐसे समय में हुई है जब भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से कनाडा के दौरे पर थे। कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का प्रशासन पूर्ववर्ती जस्टिन ट्रूडो सरकार की गलतियों से सबक लेंगे। हालांकि, उच्चायुक्त पर हुए इस ताज़ा हमले ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
विशेष संदर्भ: हाल ही में एक साक्षात्कार में उच्चायुक्त पटनायक ने कनाडा में सक्रिय ‘खालिस्तानी इकोसिस्टम’ और उसके फंडिंग मॉडल का पर्दाफाश किया था। जानकारों का मानना है कि यह हमला उसी स्पष्टवादिता का एक हिंसक प्रतिशोध हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया का पक्षपाती रवैया
वैसे आपको यह भी बता दें कि कनाडा के इंडियन हाई कमीशन और हाई कमिश्नर के ऊपर यह पहला हमला नहीं है। इससे पहले साल 23 मार्च 2023 को ओटावा हाई कमीशन के बाहर खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने हाई कमीशन के बाहर जमा होकर बैरिकेड/फेंस हिलाया, खालिस्तानी झंडे लगाए और नारेबाजी की। सितंबर 2023 सेम प्लेस हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड के बाद बहुत बड़ा बवाल काटा गया। इस पूरे प्रकरण में वैश्विक मीडिया संस्थानों, विशेषकर रॉयटर्स (Reuters) जैसे निकायों का रुख भी चर्चा का विषय है। आपको बताते हैं कि साल 2023 में जो हमले हुए उसको लेकर Reuters ने यह लिखा कि Canadian Sikhs stage protests against Indian government over murder. कहीं भी खालिस्तान शब्द का ज़िक्र नहीं था.
प्रमुख चिंताएं और भविष्य की राह
इस घटना ने निम्नलिखित तीन बिंदुओं को प्रमुखता से उभारा है:
- राजनयिक सुरक्षा: वियना कन्वेंशन के तहत मेज़बान देश विदेशी राजनयिकों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है, जिसमें कनाडा विफल साबित हुआ है।
- द्विपक्षीय संबंधों में दरार: आर्थिक सहयोग की चर्चाओं के बीच ऐसी हिंसक घटनाएं विश्वास की कमी (Trust Deficit) को और गहरा करती हैं।
- कनाडाई राजनीति का तुष्टिकरण: भारतीय समुदाय और विशेषज्ञों का मानना है कि वहां की आंतरिक राजनीति के कारण चरमपंथी तत्वों पर लगाम नहीं कसी जा रही है।
बस इस घटना के बाद देखा यह होगा कि कनाडा और भारत के रिश्ते पर इसका क्या असर पड़ता है.
