नीतीश-नायडू के दौर में मोदी-शाह का नया ‘मास्टरप्लान’, ममता बनर्जी की घेराबंदी तेज
केंद्र में गठबंधन सरकार के नए समीकरणों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी भविष्य की राजनीतिक जमीन को सुरक्षित और मजबूत करने के लिए एक बड़े प्लान पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निशाने पर इस बार पश्चिम बंगाल है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी के प्रभुत्व वाले इस राज्य के लिए बीजेपी ने एक नया और आक्रामक ‘बेंगल प्लान’ तैयार किया है, जिसके राजनीतिक मायने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक जुड़े हैं।
सहयोगियों पर निर्भरता कम करने की कवायद
मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में बीजेपी केंद्र में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नीतीश कुमार और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के चंद्रबाबू नायडू जैसे प्रमुख सहयोगियों के समर्थन पर टिकी है। इस स्थिति के बीच बीजेपी आलाकमान का पूरा ध्यान इस बात पर है कि पार्टी की अपनी स्वतंत्र ताकत को कैसे बढ़ाया जाए।
- लोकसभा सीटों का गणित: पश्चिम बंगाल एक ऐसा राज्य है जहां लोकसभा की 42 सीटें हैं। बीजेपी का मानना है कि यदि बंगाल में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर होता है, तो भविष्य में वह लोकसभा सांसदों (MPs) की अपनी संख्या में बड़ा इजाफा कर सकती है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: बंगाल में अपनी ताकत बढ़ाकर बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगियों पर अपनी राजनीतिक निर्भरता को काफी हद तक कम करना चाहती है।
राहुल और अखिलेश के चक्रव्यूह को तोड़ने की रणनीति
राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार सरकार को घेर रहे हैं। ममता बनर्जी भी इस विपक्षी खेमे (INDIA गठबंधन) की एक बेहद मजबूत और मुखर आवाज हैं। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बीजेपी बंगाल में ममता बनर्जी को स्थानीय स्तर पर ही प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चों पर उलझाए रखने में कामयाब होती है, तो इससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता की धार को काफी हद तक कमजोर किया जा सकेगा।
जमीनी स्तर पर इन मुद्दों को धार देगी बीजेपी
बीजेपी के इस नए प्लान के तहत पश्चिम बंगाल में आक्रामक राजनीति की रूपरेखा तैयार की गई है:
- केंद्रीय योजनाओं का मुद्दा: राज्य में केंद्रीय योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत और पीएम आवास योजना) को लागू करने में आ रही बाधाओं को बीजेपी जनता के बीच प्रमुखता से उठाएगी।
- स्थानीय भ्रष्टाचार: भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर ममता सरकार को लगातार घेरने के लिए राज्य इकाई को नए निर्देश दिए गए हैं।
- संगठनात्मक फेरबदल: बंगाल बीजेपी में जमीनी स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं ताकि कार्यकर्ताओं के भीतर नए सिरे से ऊर्जा का संचार किया जा सके।
संक्षेप में कहें तो, मोदी-शाह का यह नया ‘बेंगल प्लान’ केवल एक राज्य का चुनाव जीतने की रणनीति नहीं है, बल्कि यह दिल्ली दरबार में बीजेपी के अपने वर्चस्व को सुरक्षित रखने का एक बड़ा दांव है। ममता बनर्जी के अभेद्य किले में सेंध लगाने की यह कोशिश आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दिशा तय करेगी।
