पश्चिम बंगाल: सरकार बदलते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बड़ा एक्शन, गृह मंत्री अमित शाह ने दी देश छोड़ने की सख्त चेतावनी

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Bangladeshi Illegal Migrants: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई शुरू हो गई है। सालों से बंगाल के विभिन्न इलाकों में पैर जमाए बैठे घुसपैठियों, जो सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाकर इसे अपना घर मान चुके थे, के दिन अब लदने वाले हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि भारत में अब एक भी अवैध नागरिक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शाह के इस बयान के बाद से न सिर्फ घुसपैठियों में खौफ है, बल्कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले कई दिग्गज नेताओं की भी नींद उड़ गई है।

कब फला-फूला घुसपैठ का तंत्र ?

बंगाल में घुसपैठ की समस्या का इतिहास पुराना है। लेफ्ट की बसु सरकार के कार्यकाल के दौरान बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बंगाल में बड़े पैमाने पर प्रवेश करना शुरू किया था। उस दौरान विपक्ष में रहते हुए ममता बनर्जी ने इसका पुरजोर विरोध किया था, लेकिन सत्ता की कमान हाथ में आते ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) का रुख बदल गया। टीएमसी के 15 सालों के शासनकाल में वोटबैंक की राजनीति के चलते इन घुसपैठियों को कथित तौर पर संरक्षण मिला। आलम यह हो गया कि ये घुसपैठिए बंगाल के कोने-कोने में फैल गए, जिससे स्थानीय बंगाली समाज का जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने लगा और आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानियां खड़ी हो गईं।

शुभेंदु अधिकारी का ताबड़तोड़ एक्शन

साल 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा और 77 सीटें जीतकर राज्य में एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरी। इससे स्थानीय बंगाली समाज में यह भरोसा जगा कि उनकी संस्कृति और हितों की रक्षा के लिए अभी विकल्प मौजूद है। इसी का नतीजा रहा कि हालिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने घुसपैठ के मुद्दे को अपनी हर रैली, नुक्कड़ सभा और चौराहों पर प्रमुखता से उठाया। जनता ने इस मुद्दे पर मुहर लगाई और बीजेपी ने रिकॉर्ड बहुमत से चुनाव जीतकर ममता बनर्जी की सत्ता को उखाड़ फेंका। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनते ही अवैध प्रवासियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी गई। सरकार के कड़े रुख को देखते हुए बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद ही बंगाल छोड़कर भागने को मजबूर हो रहे हैं, जिसकी कई तस्वीरें भी सामने आई हैं।

अमित शाह की चेतावनी

इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा बयान देकर घुसपैठियों को अंतिम चेतावनी दे दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“देश से प्रत्येक घुसपैठिए को निकालना हमारी सरकार का दृढ़ संकल्प है। हम चाहते हैं कि जो लोग अवैध तरीके से सीमा पार कर भारत में घुसे हैं, वे खुद ही वापस चले जाएं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो राज्य सरकार उनके खिलाफ कोई कानूनी मामला (केस) दर्ज नहीं करेगी, बल्कि उनकी सुरक्षित वापसी में पूरी मदद करेगी।”

शाह के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि अगर वे स्वेच्छा से नहीं जाते हैं, तो सरकार के पास उनसे निपटने के अन्य सख्त कानूनी उपाय भी तैयार हैं। इस बयान के बाद से उन राजनीतिक दलों में खलबली मच गई है, जो अब तक इन घुसपैठियों को अपना पक्का वोटबैंक मानकर राजनीति कर रहे थे।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा अभेद्य, ‘चिकन नेक’ पर भी बड़ा फैसला

घुसपैठ की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर युद्धस्तर पर फेंसिंग (बाड़ लगाने) का काम शुरू कर दिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में सरकार बनने के महज सात दिनों के भीतर बीएसएफ (BSF) को फेंसिंग के लिए 600 एकड़ जमीन सौंपने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील ‘चिकेन नेक’ (Siliguri Corridor) इलाके की 121 हेक्टेयर जमीन भी केंद्र सरकार को सौंप दी है। यह इलाका पूर्वोत्तर के राज्यों को पूरे भारत से जोड़ता है, इसलिए इसकी सुरक्षा देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार के इन कदमों से साफ है कि आने वाले दिनों में सीमा पार से परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा।

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