TMC में ‘गृहयुद्ध’: ममता के एक महिला सांसद ने अपनी ही पार्टी के दिग्गज सांसद के ऊपर लगाए संगीन आरोप !
फोटो आभार : एक्स (Twitter)
15 साल की दोस्ती में दरार? काकोली घोष बनाम कल्याण बनर्जी
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का जो किला कभी अभेद्य माना जाता था, आज उसकी दीवारें अंदरूनी कलह से दरक रही हैं। 2026 विधान सभा चुनाव के चुनावी नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक ऐसा ‘महाभारत’ शुरू हो गया है, जिसने पार्टी की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खबर हैरान करने वाली है बात यह है कि TMC की दिग्गज सांसद काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के चीफ व्हिप और वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। काकोली घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ अपमानजनक भाषा और दुर्व्यवहार की औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है।
संसद में ‘मजाक’ उड़ाने वाले खुद विवादों में
आपको याद होगा 2024 के चुनाव के बाद संसद का वह दृश्य, जब कल्याण बनर्जी ने भाजपा को चिढ़ाने के लिए ‘कीत-कीत-कीत’ करके डांस किया था। सोशल मीडिया पर वह वीडियो खूब वायरल हुआ था। लेकिन आज वही कल्याण बनर्जी अपनी ही महिला साथी सांसदों के निशाने पर हैं।
बड़ा सवाल: जो नेता संसद के बाहर भाजपा पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप लगाते हैं, उनके अपने ही दल की महिला सांसद सुरक्षित क्यों महसूस नहीं कर रही हैं?
आरोपों की लंबी फेहरिस्त: क्या है कल्याण बनर्जी का ट्रैक रिकॉर्ड?
कल्याण बनर्जी पर लगे ये आरोप नए नहीं हैं। इससे पहले भी TMC की ही तेज-तर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने भी उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठाए थे।
- विवादित वीडियो: होली के दौरान महिलाओं के साथ कल्याण बनर्जी के ‘शरारत’ भरे वीडियो अक्सर चर्चा में रहते हैं।
- मटरगश्ती का आरोप: सिर्फ कल्याण ही नहीं, TMC के बुजुर्ग सांसद सौगत राय का भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे संसद की कार्यवाही के दौरान महिला सांसद के साथ गप्पे मारते देखे गए थे।
इस्तीफे की असली वजह: क्या ममता ने की पक्षपात?
पार्टी के भीतर यह कलह 27 मई (बुधवार) को चरम पर पहुँच गई। काकोली घोष ने पार्टी संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
विवाद की जड़: खबरों की मानें तो ममता बनर्जी ने काकोली घोष को चीफ व्हिप के पद से हटाकर कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंप दी। इसी फैसले से नाराज होकर काकोली घोष ने न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि अब कानूनी और संसदीय कार्रवाई की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आख़िर कहाँ जाकर खत्म होता है।
