अमेठी विवाद: महिला विधायक के घर हमले पर अखिलेश यादव की चुप्पी, ओपी राजभर ने ‘PDA’ एजेंडे को घेरा
UP Politics: उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल के बीच अमेठी से आई एक बड़ी खबर ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। खुद को पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों (PDA) का मसीहा बताने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) अब अपनी ही पार्टी के भीतर सुलग रही बगावत और अंतर्विरोधों के कारण चौतरफा घिर गई है। अमेठी में सपा की महिला विधायक के घर पर हुए हमले और उस पर शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी को लेकर योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश के अमेठी में समाजवादी पार्टी की अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। खबरों के मुताबिक, सपा विधायक महाराजी देवी के घर पर उनकी ही पार्टी के कुछ दबंगों और उपद्रवियों ने हमला कर दिया। आरोप है कि सपा से जुड़े इन रसूखदार लोगों ने विधायक के घर के सामने खुलेआम गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकियां दीं और विधायक के परिवार के साथ मारपीट भी की। विधायक के बेटे ने आरोप लगाया कि जब वे इस पूरी घटना का वीडियो बना रहे थे, तब हमलावरों ने उनके परिजनों से मोबाइल फोन भी छीन लिए। विधायक के बेटे ने सीधे तौर पर जय यादव, बलराम यादव और शेर बहादुर यादव का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी जय सिंह यादव कोई आम कार्यकर्ता नहीं है, बल्कि समाजवादी पार्टी के आलाकमान का बेहद करीबी माना जाता है और सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें अक्सर सपा प्रमुख के साथ देखी जाती रही हैं।
अखिलेश यादव की चुप्पी पर उठे सवाल
इस पूरे बवाल ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि हर छोटे-बड़े मुद्दे पर तुरंत सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले सपा मुखिया अखिलेश यादव अपनी ही पार्टी की एक महिला विधायक की पिटाई पर पूरी तरह मौन क्यों हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों और सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि अगर इस घटना के आरोपियों का सरनेम कुछ और होता, तो शायद अब तक समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंच चुका होता। लेकिन यहां आरोपियों का सरनेम ‘यादव’ होने के कारण अखिलेश यादव ने इस मामले से दूरी बना ली है, जिससे प्रजापति समाज से आने वाली महिला विधायक खुद को पार्टी में अकेला महसूस कर रही हैं।
ओम प्रकाश राजभर का तीखा हमला
इस मामले को लेकर योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सीधा प्रहार किया है। राजभर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट लिखी।
“अखिलेश यादव, अब तो साफ हो गया कि समाजवादी पार्टी में गैर-यादव पिछड़ों और दलितों की औकात सिर्फ झंडा-झोला ढोने, दरी बिछाने और चुनाव में वोट देने तक ही सीमित है। सम्मान, सुरक्षा और सत्ता में ‘पहिला दावा अहिर’ का ही रहेगा… बाकी सब जाएं भाड़ में।”
राजभर ने आगे तंज कसते हुए कहा कि भले ही गुंडों की कोई जाति नहीं होती, लेकिन “हर गुंडा सपाई जरूर होता है।” इस बयान ने सपा के भीतर के उस अंतर्विरोध को उजागर कर दिया है जिसे पार्टी हमेशा छुपाने की कोशिश करती रही है।

चुनावी समीकरणों पर क्या पड़ेगा असर?
यूपी चुनाव से ठीक पहले आया यह विवाद अब सिर्फ एक स्थानीय या पारिवारिक झगड़ा नहीं रह गया है, बल्कि इसने राज्य में एक बड़ा राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है। राजभर के इस हमले के बाद समाजवादी पार्टी के भीतर भी खलबली मची हुई है। गैर-यादव पिछड़े समाज में इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या अखिलेश यादव इस मामले में कोई कड़ी कार्रवाई करके अपने ‘PDA’ फॉर्मूले को टूटने से बचा पाते हैं, या फिर यह विवाद आगामी चुनावों में समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा नुकसान साबित होगा।
