पश्चिम बंगाल: विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में बड़ी बगावत, ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठे सवाल

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TMC Political Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी कलह और बगावत की चिंगारी अब एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेती जा रही है। चुनावी शिकस्त के बाद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के नेतृत्व पर न सिर्फ सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पार्टी के कई कद्दावर नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बागी तेवर अख्तियार करने की खबरें भी सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी का आंतरिक ढांचा पूरी तरह से बिखरने की कगार पर है।

15 सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलें

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के एक दर्जन से अधिक विधायकों ने खुलकर ममता बनर्जी की कार्यशैली का विरोध करना शुरू कर दिया है। वहीं, दिल्ली के सियासी हलकों में यह चर्चा बेहद तेज है कि टीएमसी के करीब 15 सांसद बहुत जल्द पार्टी का साथ छोड़कर नया राजनीतिक विकल्प चुन सकते हैं। पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति इस कदर बढ़ चुकी है कि नंदीग्राम सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए टीएमसी को कोई मजबूत उम्मीदवार तक नहीं मिल पा रहा है।

TMC के 18 नेता असंतुष्ट

अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के कम से कम 18 वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता इस वक्त अपनी ही पार्टी और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। असंतुष्टों की इस सूची में सांसद कल्याण बनर्जी, विधायक कुणाल घोष और मनोज तिवारी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। ये वे चेहरे हैं जो अब तक पार्टी का प्रमुख स्तंभ माने जाते थे, लेकिन अब इनके बागी रुख ने नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

शुभेंदु अधिकारी की गोपनीय बैठक 

राज्य में राजनीतिक हलचल उस वक्त और तेज हो गई, जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक गोपनीय बैठक की खबरें सामने आईं। इस बैठक में बारासात से टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और 6 मौजूदा विधायकों की मौजूदगी की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि टीएमसी के करीब 12 सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के साथ अपनी रणनीतिक सहमति बना ली है। ये सांसद या तो सीधे भाजपा में शामिल हो सकते हैं या फिर बाहर से सरकार को समर्थन दे सकते हैं। चर्चा है कि यह बातचीत अपने अंतिम दौर में है और बागी सांसदों का यह आंकड़ा जल्द ही 20 के पार जा सकता है।

100 से अधिक पार्षदों का इस्तीफा

आगामी निकाय चुनावों से ठीक पहले टीएमसी को जमीनी स्तर पर भी बड़ा झटका लगा है। खबरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के भीतर 100 से अधिक पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ये पार्षद अब खुलकर पार्टी के आंतरिक प्रबंधन और सांसद अभिषेक बनर्जी के ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

संकट में ममता बनर्जी का राजनीतिक साम्राज्य

पार्टी में मची इस भगदड़ को रोकने के लिए ममता बनर्जी ने सभी पार्षदों और नेताओं से एकजुट रहने की भावुक अपील की है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असंतोष की यह आग अब ममता बनर्जी के नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। यदि विधायकों और सांसदों की बगावत हकीकत में तब्दील होती है, तो आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के वजूद पर एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

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